Shankesh Jewellers के शेयर आज शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री करते हुए ₹103.30 पर लिस्ट हुए। यह IPO प्राइस ₹93 से करीब **11%** ज्यादा था। कंपनी ने IPO से **₹367.18 करोड़** जुटाए हैं, जिनका इस्तेमाल बिजनेस बढ़ाने और कर्ज घटाने में किया जाएगा।
शेयर बाजार में शानदार शुरुआत
Shankesh Jewellers ने 25 अगस्त, 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ₹103.30 के भाव पर डेब्यू किया। यह IPO की तय कीमत ₹93 से 11.08% का प्रीमियम था। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर भी कंपनी के शेयर ₹102.20 पर खुले, जो 9.89% की बढ़त दिखाता है। बाजार की उम्मीदों से यह लिस्टिंग काफी बेहतर रही, क्योंकि ग्रे मार्केट में केवल 3% के छोटे से लाभ का अनुमान लगाया जा रहा था।
IPO से जुटाए ₹367 करोड़
इस पब्लिक ऑफरिंग के जरिए Shankesh Jewellers ने कुल ₹367.18 करोड़ जुटाए हैं। इसमें ₹274.18 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹93 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल था। 18 से 20 अगस्त के बीच हुई बिडिंग प्रक्रिया में इश्यू को 2.80 गुना सब्सक्राइब किया गया था, जो निवेशकों की ओर से अच्छी रुचि दर्शाता है।
B2B मॉडल और जोखिम
Shankesh Jewellers मुख्य रूप से B2B यानी बिजनेस-टू-बिजनेस सेगमेंट में काम करती है। यह कंपनी 22k और 18k सोने के हस्तनिर्मित गहनों का निर्माण और सप्लाई करती है। रिटेल ज्वैलरी ब्रांड्स के विपरीत, इनका बिजनेस मॉडल अन्य बड़ी ज्वैलरी चेन्स को सप्लाई करने पर आधारित है। कंपनी का प्रोडक्शन नेटवर्क थर्ड-पार्टी कारीगरों और जॉब वर्कर्स पर काफी निर्भर करता है, इसलिए प्रोडक्शन की स्पीड और क्वालिटी मैनेजमेंट पर टिकी होती है। इस नेटवर्क में किसी भी तरह की देरी या क्वालिटी इश्यू से ऑर्डर पूरा करने में दिक्कत आ सकती है।
सोने के बिजनेस के खतरे
गोल्ड ज्वैलरी बिजनेस में कुछ खास फाइनेंशियल जोखिम जुड़े होते हैं। कंपनी को कच्चा सोना खरीदने और इन्वेंट्री बनाए रखने के लिए बड़े वर्किंग कैपिटल की जरूरत होती है, जिससे कैश फ्लो पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, सोने की कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव से कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है।
फंड का उपयोग
IPO से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने, एडवांस्ड बॉरोइंग्स को प्री-पे करने और रोजमर्रा की वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। कंपनी के ऑपरेशंस के लिए कर्ज लेना पड़ता है, इसलिए भविष्य में कर्ज का स्तर कम होने से कंपनी की फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ सकती है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को कंपनी की वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट क्षमता और कच्चे माल की कीमतों के प्रति संवेदनशील सेक्टर में उसके प्रदर्शन पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, कुछ बड़ी ज्वैलरी चेन्स पर ज्यादा निर्भरता भी एक जोखिम हो सकती है, अगर वे अपनी खरीद कम कर दें।
