कंपनी में बड़ा फेरबदल: आ रहे हैं नए प्रमोटर्स!
Navigant Corporate Advisors Limited, जो ऑफर के मैनेजर के तौर पर काम कर रही है, ने Shah Foods Limited के लिए एक औपचारिक ओपन ऑफर की घोषणा की है। यह पूरा मामला दो बड़ी डील्स के कारण सामने आया है:
- प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट (Preferential Allotment): Shah Foods के बोर्ड ने 2,27,17,500 नए इक्विटी शेयर जारी करने की मंजूरी दी है। इनमें से 1,58,85,037 शेयर मिस्टर अंकित Jalan और मिस्टर अनुज Jalan (जिन्हें 'Acquirers' कहा जा रहा है) और उनके 'Persons Acting in Concert' (PACs) को ₹62.50 प्रति शेयर के भाव पर दिए जाएंगे। यह डील Tandhan Power Technologies Private Limited में हिस्सेदारी खरीदने के बदले में हो रही है। वहीं, 68,32,463 शेयर पब्लिक कैटेगरी के इनवेस्टर्स को ₹110 प्रति शेयर के ऊंचे दाम पर इशू किए जाएंगे।
- शेयर परचेज एग्रीमेंट (Share Purchase Agreement - SPA): Acquirers ने मौजूदा प्रोमोटर्स/विक्रेताओं से 2,92,839 मौजूदा इक्विटी शेयर ₹60 प्रति शेयर के भाव पर खरीदने का समझौता भी किया है।
इन दोनों डील्स के बाद, Acquirers और PACs के पास Shah Foods के 69.39% शेयर होंगे, जिससे वे कंपनी के नए प्रमोटर ग्रुप बन जाएंगे।
ओपन ऑफर: माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के लिए एग्जिट का रास्ता?
नए प्रोमोटर्स ने सभी पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए एक ओपन ऑफर निकाला है। इसके तहत, वे 60,61,900 इक्विटी शेयर खरीदेंगे, जो कंपनी की कुल इक्विटी का 26% है। ऑफर का प्राइस ₹62.50 प्रति शेयर रखा गया है। अगर सभी शेयरधारकों ने इस ऑफर को स्वीकार कर लिया, तो कुल मिलाकर ₹37.88 करोड़ का भुगतान किया जाएगा।
शेयरधारकों के लिए क्या हैं मायने?
यह ओपन ऑफर कंपनी के कंट्रोल में बड़े बदलाव का संकेत है। नए प्रोमोटर्स के आने से कंपनी की स्ट्रैटेजी (strategy) में बड़ा बदलाव आ सकता है, जो फिलहाल फल और सब्जियों के थोक व्यापार से जुड़ी है।
माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के लिए सबसे बड़ी चिंता ओपन ऑफर का प्राइस (₹62.50) है। यह SPA में दिए गए ₹60 के भाव से ज्यादा है, लेकिन उस ₹110 के भाव से काफी कम है जिस पर कुछ नए शेयर पब्लिक को इशू किए जा रहे हैं। इससे प्राइस डिस्कवरी (price discovery) की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
इसके अलावा, Shah Foods BSE पर लिस्टेड है और इसे 'बहुत कम ट्रेड होने वाला' (infrequently traded) स्टॉक बताया गया है। इससे उन शेयरधारकों के लिए लिक्विडिटी (liquidity) की समस्या हो सकती है जो अपने शेयर बेचना चाहते हैं। निवेशकों को अब रेगुलेटरी (regulatory) फाइलिंग्स और औपचारिक ऑफर डॉक्यूमेंट का इंतजार रहेगा, जिसमें ऑफर की पूरी डिटेल्स और समय-सीमा बताई जाएगी। SEBI (Substantial Acquisition of Shares and Takeovers) Regulations, 2011 के तहत, Acquirers ने कहा है कि उनके पास ऑफर की शर्तों को पूरा करने के लिए पर्याप्त फंड्स हैं।