बढ़ती कीमतों के बीच Samsung ने भारत के EMI पर स्मार्टफोन खरीदने वाले बाज़ार में बाज़ी मार ली है। कंपनी ने Apple और Vivo जैसे दिग्गजों को पछाड़ दिया है। NBFCs की मदद से EMI फाइनेंसिंग, खासकर छोटे शहरों में, ग्राहकों की मांग बनाए रखने के लिए ज़रूरी हो गई है।
क्या हुआ?
काउंटरपॉइंट रिसर्च के नए आंकड़ों के मुताबिक, Samsung भारत में ईज़ी मंथली इंस्टॉलमेंट (EMI) फाइनेंसिंग के ज़रिए स्मार्टफोन बेचने के मामले में सबसे आगे निकल गया है। भले ही प्रीमियम ब्रांड अक्सर सुर्खियां बटोरते हैं, लेकिन फाइनेंस पर बिकने वाले स्मार्टफोन की असली बिक्री में Samsung, Vivo और Oppo जैसे ब्रांड्स का दबदबा है, जिनकी ऑफलाइन रिटेल में मज़बूत पकड़ है। यह ट्रेंड बताता है कि कैसे भारतीय ग्राहक अब फोन खरीद रहे हैं, क्योंकि स्मार्टफोन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और एक बड़े वर्ग के लिए एकमुश्त भुगतान करना मुश्किल हो रहा है।
फाइनेंसिंग की ओर बढ़ता रुझान
जैसे-जैसे कॉम्पोनेंट की कीमतें, खासकर मेमोरी की, बढ़ी हैं, वैसे-वैसे स्मार्टफोन की औसत लागत भी बढ़ी है। इस वजह से, क्रेडिट कार्ड EMI और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के लोन वाली फाइनेंसिंग स्कीमें बिक्री की रफ़्तार बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी हो गई हैं। इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, 2026 तक भारत में स्मार्टफोन की कुल बिक्री में फाइनेंसिंग का हिस्सा लगभग 42% तक पहुँचने का अनुमान है, जो 2025 में करीब 35% था। इससे पता चलता है कि फाइनेंसिंग अब महज़ एक अतिरिक्त विकल्प नहीं, बल्कि भारतीय स्मार्टफोन बाज़ार को सहारा देने वाला एक अहम स्तंभ बन गया है।
रिटेल और NBFCs की भूमिका
इस क्षेत्र में Samsung की बढ़त का एक कारण इसका अपना फाइनेंसिंग प्लेटफॉर्म 'Samsung Finance+' है, जो सीधे रिटेल नेटवर्क से जुड़ा है। पूरी तरह ऑनलाइन ब्रांडों के विपरीत, Samsung, Vivo और Oppo जैसी कंपनियां अपने बड़े फिजिकल स्टोर नेटवर्क का इस्तेमाल ग्राहकों को लोन अप्लाई करने की प्रक्रिया में मदद करने के लिए करती हैं। ये ऑफलाइन स्टोर ऐसे अहम संपर्क बिंदु के तौर पर काम करते हैं, जहाँ ग्राहक आसानी से EMI स्कीम के लिए साइन अप कर सकते हैं। NBFCs एक बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, जो इन फाइनेंस वाली डील्स में से लगभग 67% को सपोर्ट कर रहे हैं। यह खासकर छोटे शहरों और कस्बों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जहाँ पारंपरिक क्रेडिट कार्ड की पहुंच अभी भी बढ़ रही है।
कारोबारी संदर्भ और जोखिम
स्मार्टफोन सेक्टर ने 2026 की पहली छमाही में सप्लाई की कमी और मेमोरी की बढ़ती कीमतों के कारण काफ़ी दबाव झेला है। जहाँ फाइनेंसिंग डिवाइस की ऊंची कीमतों के असर को कम करने में मदद करती है, वहीं यह सेक्टर की परफॉरमेंस को NBFCs की उपलब्धता और उनके रिस्क लेने की क्षमता से भी जोड़ती है। अगर फाइनेंसिंग की लागत बढ़ती है या NBFCs एसेट क्वालिटी की चिंताओं के कारण अपनी लोन देने की शर्तों को सख्त करते हैं, तो इस EMI-आधारित बिक्री मॉडल की ग्रोथ पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा, भले ही मजबूत ऑफलाइन उपस्थिति वाले ब्रांडों को फिलहाल फायदा हो रहा है, लेकिन उन्हें अपने रिटेल नेटवर्क को बनाए रखने की लागत और क्रेडिट-आधारित बिक्री की क्षमता के बीच संतुलन बनाना होगा।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
स्मार्टफोन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर नज़र रखने वाले निवेशक कुल तिमाही वॉल्यूम में फाइनेंसिंग-आधारित बिक्री के योगदान पर नज़र रख सकते हैं। ध्यान देने वाले प्रमुख कारकों में मेमोरी कॉम्पोनेंट की कीमतों की स्थिरता शामिल है, जो अंतिम उपभोक्ता मूल्य को प्रभावित करती है, और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को सेवा देने वाले प्रमुख NBFCs के लोन देने के रुझान। इसके अलावा, टियर-2 और टियर-3 शहरों में ग्राहकों की मांग के पैटर्न में बदलाव, जहाँ क्रेडिट ग्रोथ वॉल्यूम को बढ़ा रही है, प्रमुख स्मार्टफोन निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर बना रहेगा।
