कंपनी के हालिया नतीजे बाजार की दोहरी हकीकत बयां कर रहे हैं: एक तरफ जहां पारंपरिक चैनलों में वॉल्यूम में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, वहीं दूसरी ओर ई-कॉमर्स सेगमेंट में आक्रामक प्राइसिंग और बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा के चलते मार्जिन पर दबाव देखा जा रहा है। Safari Industries ने भले ही अपनी जयपुर सुविधा के सहारे लगभग 20% वॉल्यूम ग्रोथ को भुनाते हुए रेवेन्यू में 15.7% साल-दर-साल (YoY) की दमदार बढ़ोतरी दर्ज की हो, लेकिन बाज़ार में सीधी प्रतिस्पर्धा निर्विवाद रूप से कड़ी है।
प्रीमियम सेगमेंट मेंCarlton के साथ नई उड़ान
इस प्रीमियम सेगमेंट में उतरने की कवायद के तहत, Safari ने Carlton Retail Private के साथ एक एक्सक्लूसिव 20 साल की लाइसेंसिंग एग्रीमेंट की है। इस डील के तहत कंपनी भारत में Carlton लगेज ब्रांड के मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की जिम्मेदारी संभालेगी। VIP Industries के इस ब्रांड से बाहर निकलने के बाद, Safari ने इसके लिए ₹99.5 करोड़ का सिक्योरिटी डिपॉजिट और एक रॉयल्टी अरेंजमेंट तय किया है।
क्षमता विस्तार और ₹500 करोड़ जुटाने की तैयारी
कैपेसिटी की दिक्कतों को दूर करने के लिए भी कंपनी कदम उठा रही है। इसके जयपुर प्लांट का यूटिलाइजेशन 85-90% पर चल रहा है, और प्रीमियम ब्रांड्स जैसे Safari Select और Urban Jungle के लिए Halol में एक नई लाइन तैयार है। भविष्य में FY27 और FY28 की ग्रोथ को गति देने के लिए, कंपनी ₹500 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इस फंड का इस्तेमाल ग्रीनफील्ड एक्सपेंशन या एक्वीजिशन के लिए किया जाएगा, खासकर उन D2C ब्रांड्स पर ध्यान दिया जाएगा जिन्हें फंडिंग की दिक्कतें आ रही हैं।
मार्जिन पर दबाव का खेल
मार्केट शेयर हासिल करने के बावजूद, Safari के EBITDA मार्जिन में पिछले रिपोर्टेड क्वार्टर में 50 बेसिस पॉइंट्स (bps) की कमी आई है, जो अब 10.9% पर आ गया है। इसका मुख्य कारण 'अन्य खर्चे' ('Other Expenses') में बढ़ोतरी है, जिसमें कॉन्ट्रैक्टुअल लेबर, पावर कॉस्ट और जयपुर सुविधा में असेंबली एक्सपेंसेस का बढ़ना शामिल है। इसके अलावा, लेबर कोड एडजस्टमेंट्स और दिवाली से जुड़े खर्चों का एकमुश्त असर भी इस पर पड़ा है। हालांकि ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन थोड़ा सुधरकर 46.5% हुआ है, लेकिन ऑपरेशनल कॉस्ट के दबाव ने बड़े मुनाफे को रोका है।
इंडस्ट्री की चाल और बढ़ती प्रतिस्पर्धा
Safari जिस भारतीय लगेज मार्केट (लगभग ₹170 बिलियन CY24 में) में काम कर रही है, वह काफी गतिशील है। अनुमान है कि CY27 तक ऑर्गेनाइज्ड प्लेयर्स का मार्केट शेयर 60% हो जाएगा। इस सेक्टर में हार्ड-शेल लगेज की तरफ बड़ा रुझान देखा जा रहा है, जो अब बिक्री का लगभग 80% है। VIP Industries जैसे पुराने प्लेयर्स इस बदलाव को अपनाने में धीमे रहे, जिसके चलते उन्हें इन्वेंटरी और प्राइस वॉर का सामना करना पड़ा। VIP का मार्केट शेयर काफी कम हुआ है, और FY25 में उन्हें नेट लॉस हुआ है। वहीं, Safari ने मार्च 2019 में 16.7% से बढ़कर दिसंबर 2022 तक 24% मार्केट शेयर हासिल किया है। Mokobara और Nasher Miles जैसे नए D2C ब्रांड्स भी अपनी डिज़ाइन, स्टोरीटेलिंग और सीधी ऑनलाइन एंगेजमेंट से प्रतिस्पर्धा बढ़ा रहे हैं।
जोखिम और भविष्य का नज़रिया
हालांकि, कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी की तारीफ हो रही है, लेकिन लगातार डिस्काउंटिंग, खासकर ई-कॉमर्स चैनल पर जहां डिस्काउंट 75% तक पहुंच गए, लाभप्रदता के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई है। मास मार्केट में वॉल्यूम ग्रोथ पर कंपनी की निर्भरता, जो लगातार कमोडिटाइज्ड हो रही है, प्रीमियमाइजेशन स्ट्रेटेजी के लिए एग्जीक्यूशन रिस्क पैदा करती है। ₹500 करोड़ की फंडरेजिंग, जो एक्सपेंशन के लिए जरूरी है, अगर प्रभावी ढंग से मैनेज न की जाए या एक्वीजिशन मुश्किल साबित हों, तो डाइल्यूशन का खतरा भी है। दिसंबर 2025 के हालिया नतीजों में PAT 20.8% गिरकर आया, जो निकट अवधि की चुनौतियों को दर्शाता है। इसके अलावा, ग्रोथ के बावजूद Safari का स्टॉक पिछले एक साल में -12.06% रिटर्न के साथ बेंचमार्क इंडेक्स से पीछे रहा है। RSI 41.7 और MACD पर बियरिश सेंटीमेंट दिख रहा है।
विश्लेषक इस पर सावधानी के साथ आशावादी बने हुए हैं, जिनका औसत 'Buy' रेटिंग और टारगेट प्राइस INR 2,622.80 है। Motilal Oswal सेक्टर के लिए 12% CAGR का अनुमान लगाता है और VIP Industries व Safari Industries को टॉप पिक्स मानता है। उनका अनुमान है कि FY25-FY28E में Safari का रेवेन्यू/EBITDA/APAT CAGR क्रमशः 16%/25%/27% रहेगा। भारत की युवा जनसांख्यिकी और बढ़ती संपन्नता के कारण लंबी अवधि की मांग बनी रहेगी। हालांकि, तीव्र मूल्य प्रतिस्पर्धा से निपटना और Carlton पार्टनरशिप का प्रभावी ढंग से लाभ उठाना, मुनाफे वाली ग्रोथ बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा।