ग्रोथ की रफ्तार, पर प्रॉफिट पर दबाव
Safari Industries ने 3QFY26 में ₹5.12 अरब का रेवेन्यू हासिल किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 15.7% ज्यादा है। कंपनी की बिक्री की मात्रा (Sales Volume) में करीब 20% की जबरदस्त तेजी देखी गई। कंपनी का नया जयपुर प्लांट भी 85-90% की क्षमता पर चल रहा है। हालांकि, इस वॉल्यूम ग्रोथ को हासिल करने के लिए कंपनी को मार्केट शेयर कैप्चर करने हेतु भारी डिस्काउंट देना पड़ा, जिसका सीधा असर प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ा।
मार्जिन में गिरावट का कारण
इस तिमाही में Safari Industries के EBITDA मार्जिन में पिछले साल की समान अवधि के 11.4% से घटकर 10.9% रह गया। वहीं, पिछली तिमाही यानी 2QFY26 के 15.02% की तुलना में यह बड़ी गिरावट है। इसी तरह PAT मार्जिन पर भी दबाव देखा गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों चैनलों में बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा और भारी डिस्काउंटिंग के कारण कंपनी को यह मार्जिन सैक्रिफाइस करना पड़ा। हालांकि, कंपनी ने ऑपरेशनल एफिशिएंसी और जयपुर प्लांट में बैकवर्ड इंटीग्रेशन से कुछ लागत बचाने की कोशिश की, लेकिन डिस्काउंटिंग का असर ज्यादा रहा।
भारतीय लगेज मार्केट में क्या चल रहा है?
भारतीय लगेज मार्केट का आकार 2025 में करीब $4.0 अरब का है और इसके 2028 तक ₹267 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 12% की CAGR ग्रोथ दिखेगी। बढ़ते डिस्पोजेबल इनकम, ज्यादा डोमेस्टिक और इंटरनेशनल ट्रैवल, और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग इसके मुख्य कारण हैं। Safari, VIP Industries और Samsonite जैसे ऑर्गेनाइज्ड प्लेयर इस मार्केट के 90% से ज्यादा हिस्से पर काबिज हैं। Samsonite भारत में ₹250 करोड़ का निवेश करके अपना ग्लोबल हब बना रहा है, जबकि VIP Industries जैसी कुछ कंपनियां चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
वैल्यूएशन पर उठ रहे सवाल
Safari Industries के शेयर का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) करीब 51.56 से 67.6 के बीच चल रहा है, जो इंडस्ट्री के मुकाबले प्रीमियम माना जा रहा है। कंपनी की पिछली तिमाही के नतीजों में ऑपरेटिंग और PAT मार्जिन में आई क्रमिक गिरावट (जो कई तिमाहियों के निचले स्तर पर हैं) के चलते इसके प्रीमियम वैल्यूएशन पर सवाल उठ रहे हैं। ₹1,766.50 के आसपास ट्रेड कर रहे इस शेयर में साल की शुरुआत से अब तक करीब 4.68% की गिरावट आई है।
जोखिम और एनालिस्ट की राय
कंपनी के सामने सबसे बड़ा जोखिम बढ़ती प्रतिस्पर्धा, डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स का उदय, और मार्जिन पर लगातार बना रहने वाला दबाव है। इस तिमाही में कंपनी के कर्मचारी खर्चों में 25.2% की YoY ग्रोथ देखी गई, और ऑपरेटिंग मार्जिन घटकर 13.88% रह गया, जो पिछले तीन तिमाहियों में सबसे कम है।
हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद, अधिकांश एनालिस्ट्स (10 में से 9) ने स्टॉक पर 'BUY' रेटिंग बनाए रखी है। ज्यादातर का टारगेट प्राइस ₹2,622.80 के आसपास है, जिसमें Anand Rathi ने ₹2,750 का टारगेट दिया है। Motilal Oswal ने भी ₹2,600 का टारगेट दिया है। कुछ एनालिस्ट्स ने FY26E/FY27E EPS अनुमानों को 10%-11% तक घटाया है। कंपनी की आगे की स्ट्रेटेजी में जयपुर प्लांट का पूरा उपयोग करना और नए एयरपोर्ट स्टोर्स खोलना शामिल है, लेकिन भविष्य में मार्जिन को स्थिर करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।