Safari Industries: ₹500 Cr QIP की तैयारी, पर FY25 में मुनाफे में आई **24%** की गिरावट!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Safari Industries: ₹500 Cr QIP की तैयारी, पर FY25 में मुनाफे में आई **24%** की गिरावट!
Overview

Safari Industries के नेट प्रॉफिट में पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में **24%** की बड़ी गिरावट आई है, जो **₹117.53 करोड़** पर आ गया है। हालांकि, नेट सेल्स **14.2%** बढ़कर **₹1,769.66 करोड़** हो गई है। इस बीच, कंपनी ने लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और विस्तार के लिए **₹500 करोड़** का Qualified Institutions Placement (QIP) लाने का ऐलान किया है।

Safari Industries (India) Ltd. ने शेयरहोल्डर्स से मंजूरी के लिए दो अहम प्रस्ताव रखे हैं: मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) सुधीर जटिया की 5 साल के लिए फिर से नियुक्ति और ₹500 करोड़ का Qualified Institutions Placement (QIP)। ये कदम ऐसे समय में उठाए गए हैं जब कंपनी के प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में फाइनेंशियल ईयर 25 (FY25) के दौरान 24% की गिरावट देखी गई है।

आंकड़े क्या कहते हैं?

  • FY25 में कंपनी की नेट सेल्स 14.2% बढ़कर ₹1,769.66 करोड़ रही, जो FY24 में ₹1,548.85 करोड़ थी। FY23 में यह ₹1,210.63 करोड़ थी।
  • हालांकि, प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) में 25.3% की गिरावट आई और यह ₹152.28 करोड़ पर आ गया, जो FY24 में ₹203.78 करोड़ था। FY23 में PBT ₹157.18 करोड़ था।
  • प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 24.0% घटकर ₹117.53 करोड़ हो गया, जबकि FY24 में यह ₹154.48 करोड़ था। FY23 का PAT ₹118.94 करोड़ था।
  • कंपनी का नेट वर्थ 13.2% बढ़कर ₹900.81 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹796.03 करोड़ था।

मार्जिन पर दिखा दबाव:

कंपनी ने मार्जिन में काफी दबाव देखा है। FY24 में जहां PBT मार्जिन लगभग 13.16% था, वहीं FY25 में यह घटकर 8.6% रह गया। इसी तरह, PAT मार्जिन 9.97% से गिरकर 6.6% पर आ गया, जो रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद प्रॉफिटेबिलिटी पर चिंता जाहिर करता है।

MD की नियुक्ति और QIP का मकसद:

MD सुधीर जटिया, जिनकी कंपनी में 44.70% हिस्सेदारी है, को अप्रैल 2026 से अप्रैल 2031 तक 5 साल के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव है। उनके रेमुनरेशन में ₹13.65 लाख प्रति माह बेसिक सैलरी, परक्विजिट्स और परफॉर्मेंस-लिंक्ड पे शामिल है, जो नेट प्रॉफिट का 1% तक सीमित होगा। FY24 में उनका रेमुनरेशन ₹2.81 करोड़ था।

कंपनी का कहना है कि QIP से जुटाए गए फंड का उपयोग लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्ट्रेटेजी, बिजनेस एक्सपेंशन, कैपेसिटी बढ़ाने, संभावित एक्वीजिशन और कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए किया जाएगा। यह कंपनी की कैपिटल बेस और फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी को मजबूत करेगा।

जोखिम और आगे की राह:

निवेशकों के लिए मुख्य जोखिम यह है कि QIP से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कैसे किया जाता है और क्या इससे उम्मीद के मुताबिक रिटर्न मिल पाएगा, खासकर मुनाफे में चल रहे दबाव को देखते हुए। शेयरहोल्डर डाइल्यूशन (हिस्सेदारी का पतला होना) भी एक चिंता का विषय हो सकता है। कंपनी की भविष्य की राह इस बात पर निर्भर करेगी कि वह बढ़ी हुई कैपिटल का उपयोग करके प्रॉफिटेबल ग्रोथ कैसे हासिल करती है और मार्केट में अपनी पोजीशन कैसे मजबूत करती है।

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