SMOOR Chocolates भारत के बढ़ते प्रीमियम चॉकलेट मार्केट में अपनी पैठ बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने अगले 5 सालों में ₹800 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। यह मौजूदा FY24-25 के ₹171.9 करोड़ के रेवेन्यू से काफी ज्यादा है। इस लक्ष्य को पाने के लिए, SMOOR अपने रिटेल आउटलेट्स की संख्या को मौजूदा लगभग 75 से बढ़ाकर 200 करने की योजना बना रही है। यह विस्तार भारत के प्रीमियम चॉकलेट मार्केट के ग्रोथ ट्रेंड के साथ मेल खाता है, जिसके 2034 तक USD 2.24 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, और यह 6.74% की CAGR से बढ़ रहा है।
लाभप्रदता (Profitability) की चुनौतियां
हालांकि, कंपनी रेवेन्यू की महत्वाकांक्षाओं के बावजूद लाभप्रदता की बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। वर्तमान में, SMOOR का EBITDA लगभग -3% है, और FY24 में नेट लॉस बढ़कर ₹19 करोड़ हो गया है। कंपनी अपनी नई दुकानों से अधिक बिक्री और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करके इस स्थिति को सुधारना चाहती है। लेकिन 5% EBITDA पॉजिटिविटी इस वित्तीय वर्ष में हासिल करना मुश्किल लग रहा है, खासकर कोको की कीमतों में अस्थिरता और कोल्ड-चेन लागत जैसे दबावों के चलते।
मार्केट की चुनौतियां और ऑपरेशनल बाधाएं
SMOOR का मुकाबला Mondelez, Nestle, और Hershey जैसे ग्लोबल ब्रांड्स से है, जिनका भारतीय चॉकलेट मार्केट में बड़ा हिस्सा है। प्रीमियम सेगमेंट में हाई-कोको कंटेंट, आर्टिसनल प्रोडक्ट्स और गिफ्टिंग की डिमांड के कारण तेजी देखी जा रही है, लेकिन इसके अपने ऑपरेशनल चैलेंज भी हैं। भारतीय कोको की क्वालिटी और तापमान-संवेदनशील उत्पादों के लिए बेहतर स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन की जरूरत होती है।
कंपनी का मल्टी-टचपॉइंट मॉडल, जिसमें लाउंज, कैफे, कियोस्क, क्लाउड किचन और 30% रेवेन्यू वाली गिफ्टिंग पर फोकस शामिल है, ग्राहकों तक पहुंचने का प्रयास करता है। क्विक कॉमर्स चैनल से भी ₹7-8 करोड़ का योगदान मिल रहा है।
वित्तीय चिंताएं और मालिकाना हक में अनिश्चितता
SMOOR की आक्रामक विस्तार योजना और रेवेन्यू लक्ष्य, उसकी मौजूदा वित्तीय स्थिति और मार्केट दबावों को देखते हुए अनिश्चित लग रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, SMOOR की मेजॉरिटी ओनर Rebel Foods, रीस्ट्रक्चरिंग के तहत अपनी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। यह संभावित बिक्री SMOOR की भविष्य की रणनीति और ₹800 करोड़ के लक्ष्य को पाने के लिए जरूरी निवेश पर सवाल खड़े करती है।
आगे का रास्ता
SMOOR का भविष्य इन लाभप्रदता और ऑपरेशनल चुनौतियों से पार पाने की उसकी क्षमता पर निर्भर करता है। कंपनी 50-60% उत्पादों को 'ट्रूली गुड' कैटेगरी में शिफ्ट करने की योजना बना रही है, जिसमें कम चीनी और क्लीनर इंग्रेडिएंट्स होंगे। इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और संभावित इंटरनेशनल ग्रोथ नए रास्ते खोल सकती है। लेकिन तत्काल फोकस सस्टेनेबल प्रॉफिट और पॉजिटिव EBITDA की ओर एक स्पष्ट रास्ता बनाने पर होना चाहिए, खासकर जब पैरेंट कंपनी अपनी हिस्सेदारी बेचने की तलाश में है।
