हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय यात्रियों का रुझान सड़क मार्ग की ओर तेजी से बढ़ रहा है। छोटी दूरी के रास्तों पर बस ट्रैफिक में **80%** का उछाल दर्ज किया गया है, जिसके चलते Sterling Holiday Resorts और Cygnett Hotels जैसी कंपनियां अब अपनी रणनीति बदलकर 'ड्राइव-टू' डेस्टिनेशंस पर फोकस कर रही हैं।
भारत में हवाई यात्रा की बढ़ती लागत अब यात्रियों के घूमने के तरीके को पूरी तरह बदल रही है। ट्रैवल एग्रीगेटर Cleartrip के आंकड़ों के मुताबिक, फ्लाइट टिकट महंगे होने से लोग अब सड़क मार्ग को प्राथमिकता दे रहे हैं। 300 किलोमीटर से कम की दूरी वाली यात्राओं के लिए बस ट्रैफिक में 80% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि 500 से 1,000 किलोमीटर के बीच के सफर में 89% का उछाल देखा गया है। यह सिर्फ एक अस्थायी बदलाव नहीं, बल्कि एक स्ट्रक्चरल शिफ्ट है जिसने होटल कंपनियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
हाईवे का जाल और पर्यटन
भारत में नेशनल हाईवे का तेजी से होता विस्तार इस बदलाव की मुख्य वजह है। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण अब दुर्गम पर्यटन स्थल भी वीकेंड गेटवे के रूप में उभर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से Coorg, Sakleshpur और Nilgiris जाने वाले पर्यटकों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। अब वे स्थान जो पहले पहुंच से दूर लगते थे, वे हॉस्पिटैलिटी कंपनियों के लिए प्रमुख एसेट बन गए हैं।
हॉस्पिटैलिटी कंपनियों की बदली रणनीति
Sterling Holiday Resorts, Rosetta और Cygnett Hotels & Resorts जैसी दिग्गज कंपनियां अब अपनी ग्रोथ प्लान को इस नए ट्रेंड के हिसाब से ढाल रही हैं। अब उनके लिए सबसे बड़ी खूबी यह है कि ग्राहक कार से होटल तक कितनी आसानी से पहुंच सकता है। कंपनियां अब बड़े शहरों से ड्राइव करने योग्य दूरी वाले इलाकों में संपत्तियां खरीदने पर जोर दे रही हैं।
इसका असर यात्रियों के बर्ताव पर भी पड़ा है। अब लोग साल में एक लंबी छुट्टी के बजाय साल भर में कई छोटी-छोटी 2 से 3 दिन की ट्रिप्स प्लान कर रहे हैं। होटल ऑपरेटर्स के लिए यह मॉडल ऑक्यूपेंसी बढ़ाने में मददगार है, लेकिन इसके लिए उन्हें सर्विस की गुणवत्ता बनाए रखनी होगी ताकि लोकल पर्यटक दोबारा आएं।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां नए 'ड्राइव-टू' लोकेशन्स पर ऑपरेशंस और मेंटेनेंस की लागत को कैसे मैनेज करती हैं। साथ ही, शहरों के नजदीक प्राइम लोकेशन्स के लिए बढ़ती होड़ और वहां मौजूद कॉम्पिटिशन पर भी नजर रखना जरूरी है। भविष्य में वही कंपनियां सफल होंगी जो न केवल कनेक्टिविटी का लाभ उठा पाएंगी, बल्कि शानदार ऑन-साइट एक्सपीरियंस देकर ग्राहकों को बार-बार अपनी ओर खींच सकेंगी।
