LT Foods Share Price: रेवेन्यू की तूफानी तेजी के बावजूद मुनाफे में **15%** की गिरावट! शेयर पर दिखा असर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
LT Foods Share Price: रेवेन्यू की तूफानी तेजी के बावजूद मुनाफे में **15%** की गिरावट! शेयर पर दिखा असर
Overview

LT Foods के निवेशकों के लिए मिली-जुली खबर है। कंपनी ने अपने Q4 FY26 के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें रेवेन्यू में **30.4%** का शानदार उछाल देखने को मिला है, जो बढ़कर **₹2,906.7 करोड़** हो गया। हालांकि, इसी दौरान नेट प्रॉफिट **15.5%** गिरकर **₹135.7 करोड़** पर आ गया। प्रॉफिट में यह गिरावट मुख्य रूप से कंपनी के EBITDA मार्जिन में आई कमी का नतीजा है।

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मार्जिन दबाव के कारण मुनाफे में गिरावट?

LT Foods के हालिया नतीजों में एक विरोधाभास देखने को मिला है। कंपनी का रेवेन्यू जहां 30.4% बढ़कर ₹2,906.7 करोड़ तक पहुंच गया, वहीं नेट प्रॉफिट 15.5% घटकर ₹135.7 करोड़ रह गया। इस मुनाफे में गिरावट की मुख्य वजह कंपनी के EBITDA मार्जिन में आई भारी कमी है। पिछले साल इसी अवधि में जहां मार्जिन 11.6% था, वहीं इस तिमाही में यह घटकर 9.3% रह गया। इससे साफ है कि बढ़ी हुई बिक्री के बावजूद, लागत बढ़ने या कीमतों के दबाव के चलते कंपनी की कमाई पर असर पड़ा।

शेयर पर दिखा असर और डिविडेंड का ऐलान

इन नतीजों के बाद LT Foods का शेयर 0.69% गिरकर ₹410.60 पर बंद हुआ। निवेशकों का ध्यान जहां रेवेन्यू ग्रोथ पर था, वहीं प्रॉफिट में कमी और मार्जिन प्रेशर ने चिंता बढ़ाई। हालांकि, कंपनी ने शेयरधारकों को खुश करने के लिए ₹1 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड (Dividend) की भी सिफारिश की है।

FMCG सेक्टर में बढ़ती लागतें

LT Foods भारतीय FMCG सेक्टर में काम करती है, जहां गलाकाट मुकाबला है। कंपनी का वैल्यूएशन (Valuation) ITC जैसे बड़े प्लेयर्स के आसपास है, लेकिन Nestle India और Britannia जैसे स्पेशलिस्ट से यह महंगा है। FY26 के लिए इनपुट कॉस्ट (Input Cost) में बढ़ोतरी, खासकर एडिबल ऑयल (Edible Oil) और क्रूड डेरिवेटिव्स (Crude Derivatives) में, और संभावित कमजोर मॉनसून (Monsoon) के कारण रूरल डिमांड (Rural Demand) पर असर की आशंका ने मार्जिन पर दबाव बढ़ा दिया है।

मार्जिन पर दबाव की यह कोई नई बात नहीं

यह मार्जिन प्रेशर LT Foods के लिए कोई नई बात नहीं है। Q3 FY26 में भी रेवेन्यू 23.5% बढ़ा था, लेकिन EBITDA मार्जिन घटकर 11.3% हो गया था। पूरे FY26 की बात करें तो रेवेन्यू 26% बढ़कर ₹10,946 करोड़ रहा, लेकिन नेट प्रॉफिट में मामूली 2.2% की बढ़ोतरी हुई, जो ₹625.4 करोड़ रहा। यह बार-बार दिख रहा पैटर्न बताता है कि कंपनी को टॉप-लाइन ग्रोथ को बॉटम-लाइन ग्रोथ में बदलने में दिक्कत आ रही है, खासकर जब बाहरी लागतें बढ़ती हैं।

मुनाफे को दबाने वाले फैक्टर

Q4 में कंपनी का कुल खर्च भी काफी बढ़ा, जो पिछले साल के ₹2,048.9 करोड़ से बढ़कर ₹2,746.9 करोड़ हो गया। इसमें रॉ मटेरियल (Raw Material) की बढ़ी हुई खपत, इन्वेंट्री (Inventory) की खरीद, एम्प्लॉई (Employee) और फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) शामिल हैं। फाइनेंस कॉस्ट ₹34.9 करोड़ से बढ़कर ₹39.9 करोड़ हो गई। एडिटबल ऑयल और एनर्जी जैसी वोलेटाइल कमोडिटी (Volatile Commodity) के बाजार में, यह बढ़ी हुई लागत मुनाफा खा जाती है, खासकर अगर कंपनी पूरी लागत ग्राहकों पर न डाल पाए। हालांकि, कंपनी का डेट-टू-EBITDA रेश्यो (Debt-to-EBITDA Ratio) 0.95 पर मैनेजेबल (Manageable) है, लेकिन लगातार बढ़ते खर्च प्रॉफिट पर दबाव डाल सकते हैं।

भविष्य की राह और एनालिस्ट्स की राय

इन चुनौतियों के बावजूद, एनालिस्ट्स (Analysts) LT Foods के भविष्य को लेकर आम तौर पर पॉजिटिव (Positive) हैं। कई एनालिस्ट्स ने 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस ₹509 से ₹518 के बीच बताया है। Motilal Oswal और Mirae Asset Securities जैसे ब्रोकरेज हाउसेज ने ₹500-₹518 के टारगेट के साथ 'Buy' रेटिंग दी है और FY28 तक रेवेन्यू और प्रॉफिट में अच्छी ग्रोथ का अनुमान लगाया है। कंपनी के बोर्ड द्वारा ₹1 प्रति शेयर डिविडेंड की सिफारिश उसके भविष्य की कमाई में विश्वास और शेयरधारकों को रिटर्न देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.