जेनरेटिव AI पर ग्राहकों का भरोसा **40%** से कम है, फिर भी प्रोडक्ट सर्च के लिए इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। रिटेल ब्रांड्स अब अपनी डिजिटल रणनीति बदलकर 'जेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन' पर फोकस कर रहे हैं।
शॉपिंग की दुनिया में एक अजीब सा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। McKinsey के अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, जेनरेटिव AI पर ग्राहकों का भरोसा 40% के स्तर से भी नीचे गिर चुका है। इसके बावजूद, लोग खरीदारी से जुड़े फैसलों के लिए AI का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। यह स्थिति ब्रांड्स के लिए नई चुनौतियां लेकर आई है।
जेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) की चुनौती
पहले ब्रांड्स का सारा जोर ट्रेडिशनल सर्च इंजन रैंकिंग पर होता था। लेकिन अब AI मॉडल्स जानकारी को खुद समेट लेते हैं और यूजर को सीधे ब्रांड की वेबसाइट तक नहीं भेजते। इससे कंपनियों की अपने ब्रांड नैरेटिव पर पकड़ कमजोर हो रही है। अब ब्रांड्स को 'जेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन' (GEO) की ओर शिफ्ट होना पड़ रहा है, जिसमें वे अपने प्रोडक्ट डीटेल्स और स्पेसिफिकेशन्स को इस तरह बदल रहे हैं ताकि AI उन्हें आसानी से पहचान सके। जो कंपनियां इसमें फेल होंगी, वे ग्राहकों की नजरों से गायब हो सकती हैं।
'वैल्यू-फॉर-मनी' और टिकाऊपन की वापसी
केवल सस्ता सामान बेचना अब काफी नहीं रहा। आधुनिक ग्राहक अब 'रिसोर्सफुल कंजम्पशन' की तरफ बढ़ रहे हैं। लोग फैशन, ट्रैवल और ब्यूटी जैसे सेक्टर में अब टिकाऊपन और रिपेयरिंग की सुविधा को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। जो ब्रांड्स सिर्फ डिस्काउंट के भरोसे हैं, उन्हें अब अपने प्रोडक्ट डिजाइन और मार्केटिंग को नए सिरे से तय करना होगा।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
इन्वेस्टर्स के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। अब कंपनियों की सफलता केवल विज्ञापन पर निर्भर नहीं, बल्कि उनकी 'टेक्निकल एबिलिटी' पर टिकी है। जो कंपनियां अपनी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को AI के अनुकूल ढाल रही हैं और टिकाऊ उत्पादों पर फोकस कर रही हैं, वे लंबी दौड़ की खिलाड़ी साबित हो सकती हैं। मुख्य रिस्क यह है कि जो ब्रांड AI सर्च में अपनी जगह नहीं बना पाएंगे, उनकी रेवेन्यू ग्रोथ पर सीधा असर पड़ सकता है।
