Reliance Retail के दूसरी तिमाही के नतीजों में मुनाफा **24.5%** गिरकर **₹2,611 करोड़** पर आ गया है। कंपनी का रेवेन्यू **6.4%** बढ़कर **₹91,716 करोड़** रहा, लेकिन ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स में भारी निवेश के चलते मार्जिन पर दबाव देखा गया।
Reliance Industries की सब्सिडियरी Reliance Retail के लिए सितंबर 2026 की तिमाही मुनाफे के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रही है। कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर 24.5% गिरकर ₹2,611-₹2,619 करोड़ के दायरे में रहा है। हालांकि, ग्रॉस रेवेन्यू में 6.4% की बढ़त दर्ज की गई और यह ₹91,716 करोड़ तक पहुंच गया।
मुनाफे में यह गिरावट इंडस्ट्री के उस बदलते ट्रेंड को दिखाती है, जहां कंपनियां क्विक-कॉमर्स और डिजिटल डिलीवरी स्पेस में कब्जा जमाने के लिए अंधाधुंध पैसा खर्च कर रही हैं। कंपनी का EBITDA (वन-टाइम इम्पैक्ट से पहले) ₹6,228 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 8.6% कम है। इसके चलते EBITDA मार्जिन सिकुड़कर 7.8% पर आ गया है। मैनेजमेंट के अनुसार, यह मार्जिन दबाव डार्क स्टोर्स, आधुनिक वेयरहाउस और हाइपरलोकल डिलीवरी नेटवर्क बनाने की स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, ताकि भविष्य में मजबूत स्थिति बनाई जा सके।
तेजी से बढ़ता नेटवर्क
मुनाफे में अस्थायी कमी के बावजूद कंपनी ने अपने फिजिकल फुटप्रिंट का विस्तार जारी रखा है। सितंबर तिमाही के दौरान कंपनी ने 303 नए स्टोर खोले, जिसके बाद कुल स्टोरों की संख्या बढ़कर 19,947 हो गई है। कंपनी अब इन स्टोर्स को ही डिजिटल और क्विक-कॉमर्स के नोड्स के रूप में इस्तेमाल कर रही है। मैनेजमेंट का भरोसा है कि अगले 2 सालों में यह इंटेंसिव इन्वेस्टमेंट कंपनी को बेहतर ऑपरेटिंग लेवरेज और प्रॉफिटेबिलिटी दिलाएगा।
चुनौतियां और बाजार का रुख
फिलहाल रिटेल सेक्टर के सामने इनपुट-कॉस्ट महंगाई और त्योहारों के बदलते कंजम्पशन साइकिल जैसी चुनौतियां हैं। कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने जटिल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को स्केल करने और डिजिटल सेल्स को फिजिकल स्टोर्स के साथ सफलतापूर्वक इंटीग्रेट करने की है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी अपनी भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर लागत को कब तक मुनाफे में बदल पाती है और क्विक-कॉमर्स की इस गलाकाट प्रतिस्पर्धा में अपना मार्जिन कैसे सुरक्षित रखती है।
