FMCG में Reliance का दबदबा, पर मार्जिन पर पड़ेगा दबाव?
Reliance Consumer Products (RCPL) ने रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले सामानों (Staples) और एसेंशियल्स को अपना मुख्य रेवेन्यू जरनेटर बना लिया है। वित्त वर्ष 2026 में इनसे ₹8,800 करोड़ की कमाई हुई, जो कुल ग्रॉस रेवेन्यू का 40% रहा। कंपनी की कुल FMCG सेल्स पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी होकर ₹22,000 करोड़ तक पहुंच गई है। खास बात यह है कि RCPL का फ्लैगशिप सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड Campa FMCG ब्रांड सेल्स में ₹4,700 करोड़ के साथ चौथे नंबर पर रहा, जबकि एसेंशियल्स ब्रांड Independence ने ₹2,600 करोड़ का आंकड़ा छुआ।
क्विकर कॉमर्स की मार, प्रॉफिट मार्जिन पर असर
इस जबरदस्त सेल्स ग्रोथ के बावजूद, Reliance Retail Ventures के CFO, दिनेश तलूजा ने एक बड़ी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि क्विकर कॉमर्स (Quick Commerce) के आक्रामक विस्तार के कारण रिटेल मार्जिन पर दबाव बना रहेगा। कंपनी का जनवरी-मार्च तिमाही (Q4 FY25) के लिए EBITDA मार्जिन पिछले साल के 8.5% से घटकर 7.9% पर आ गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए यह मार्जिन 8.3% रहा, जो पिछले साल के 8.6% से कम है। यह दिखाता है कि कंपनी तेजी से मार्केट शेयर बढ़ाने और तत्काल मुनाफे के बीच संतुलन साध रही है।
Competitors से तुलना
भारतीय FMCG सेक्टर में वित्त वर्ष 2026 में 6-8% की ग्रोथ का अनुमान है। RCPL का प्रदर्शन जहां शानदार है, वहीं वह एक कड़े मुकाबले वाले बाजार में काम कर रहा है। उदाहरण के तौर पर, Hindustan Unilever Limited (HUL) ने वित्त वर्ष 24 में ₹59,579 करोड़ का टर्नओवर और 23.8% का EBITDA मार्जिन दर्ज किया था। वहीं, ITC के FMCG-Others सेगमेंट में Q4 FY25 में 3.7% की ग्रोथ देखी गई और सेगमेंट EBITDA मार्जिन लगभग 10% रहा। ये आंकड़े विभिन्न बड़ी FMCG कंपनियों की मार्जिन को लेकर अलग-अलग रणनीतियों को दर्शाते हैं।
आगे क्या?
क्विक कॉमर्स, जिसमें अक्सर ग्रॉसरी, पर्सनल केयर और हाउसहोल्ड आइटम्स शामिल होते हैं, बिक्री बढ़ाने में मदद करता है। लेकिन Reliance के लिए, इस चैनल में आक्रामक विस्तार, लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी की लागत के कारण, मौजूदा समय में ओवरऑल रिटेल EBITDA मार्जिन कम हो रहा है। Reliance Retail Ventures अपने मर्चेंट पार्टनर बेस को 4 मिलियन से अधिक तक ले जाने की योजना बना रही है, जिसमें Metro Cash and Carry India का अधिग्रहण भी शामिल है। हालांकि, EBITDA मार्जिन पर दिख रहा दबाव बताता है कि ग्राहकों को तेजी से जोड़ने और डिलीवरी इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत, तत्काल आय लाभों से अधिक हो सकती है। Reliance का स्टॉक इस साल अब तक 14% गिर चुका है, जो निवेशकों द्वारा ग्रोथ स्ट्रैटेजी के मुनाफे पर पड़ने वाले असर पर बारीकी से नजर रखने का संकेत देता है।
