Reliance Industries के कंज्यूमर आर्म, Reliance Consumer Products Ltd (RCPL) ने एक बड़ा माइलस्टोन हासिल किया है। कंपनी ने पहली बार EBITDA पॉजिटिव रिपोर्ट किया है, जो इसके आक्रामक विस्तार के दौर में एक अहम पड़ाव है।
EBITDA पॉजिटिव का मतलब क्या है?
EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) के पॉजिटिव होने का मतलब है कि Reliance Consumer Products अब अपने दिन-प्रतिदिन के ऑपरेटिंग खर्चों को अपने रेवेन्यू से कवर करने लगी है। यह उन कंपनियों के लिए एक बड़ी कामयाबी है जो तेजी से मार्केट में अपनी जगह बना रही हैं।
भविष्य के लिए बड़े निवेश
एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर केतन मोदी ने साफ किया है कि भले ही कंपनी ने प्रॉफिटेबिलिटी का यह स्तर पार कर लिया हो, लेकिन उनका मुख्य फोकस अभी भी मार्केट शेयर हासिल करना है। कंपनी का लक्ष्य FY2030 तक ₹1,00,000 करोड़ का रेवेन्यू जुटाना है। इसके लिए RCPL मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए ₹30,000 करोड़ का बड़ा इन्वेस्टमेंट प्लान चला रही है, जिसमें से ₹10,000 करोड़ पहले ही खर्च हो चुके हैं।
रिटेल मार्जिन पर दबाव
जहां कंज्यूमर आर्म ने EBITDA पॉजिटिव का कीर्तिमान रचा है, वहीं Reliance Retail का ओवरऑल मार्जिन पिछले तीन तिमाहियों से लगातार गिर रहा है। CFO दिनेश Taluja के मुताबिक, ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स में भारी निवेश की वजह से यह दबाव दिख रहा है। ऑनलाइन चैनलों से अब ग्रोसरी बिक्री का 13% और एपैरल व फुटवियर की 27% बिक्री हो रही है।
कंपनी अपने फिजिकल स्टोर्स को 'डार्क स्टोर्स' में बदलकर क्विक कॉमर्स का विस्तार करने की योजना बना रही है। Reliance Retail का अनुमान है कि इन निवेशों से अगले तीन सालों में रिटेल सेगमेंट का EBITDA दोगुना हो जाएगा। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनी बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के मुकाबले रेवेन्यू ग्रोथ को कितनी तेजी से बढ़ा पाती है।
