Reliance Industries ने FSSAI के उस निर्देश को अदालत में चुनौती दी है, जिसमें 'Campa' बेवरेजेज पर 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही गई थी।
रेगुलेटरी विवाद की असली जड़
यह सारा विवाद FSSAI के उस रुख को लेकर है, जिसमें कहा गया है कि मौजूदा भारतीय फूड सेफ्टी नियमों के तहत 'एनर्जी ड्रिंक' कोई मान्यता प्राप्त श्रेणी (Category) नहीं है। रेगुलेटर का तर्क है कि इस तरह के दावे अक्सर ग्राहकों को गुमराह करते हैं और इनसे जुड़ी फंक्शनल खूबियों को अभी तक आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है। जुलाई 2026 में FSSAI ने कई प्रमुख बेवरेज कंपनियों को नोटिस जारी कर अपनी पैकेजिंग से ऐसी शब्दावली हटाने को कहा था। यह कदम हाई-कैफीन वाले उत्पादों की निगरानी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
Reliance अपने ब्रांड पोजिशनिंग को लेकर काफी आक्रामक है। कंपनी ने इस कानूनी चुनौती के बीच भी अपनी रणनीति में लचीलापन दिखाते हुए 'Campa Xtra' जैसे वेरिएंट्स बाजार में उतारे हैं, जो अलग लेबलिंग के साथ आते हैं। यह कंपनी की कोशिश है कि किसी भी नियामक बदलाव का असर उसकी सेल्स पर न पड़े।
कोर्ट का रुख और भविष्य की राह
Reliance की यह कानूनी चुनौती दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे इसी तरह के अन्य मामलों से प्रेरित है। इससे पहले Red Bull जैसे ब्रांड्स के मामले में कोर्ट ने FSSAI के आदेशों को तकनीकी खामियों और उचित प्रक्रिया न अपनाने के कारण दरकिनार कर दिया था। यह न्यायिक मिसाल Reliance के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इन्वेस्टर्स के लिए यह सिर्फ एक लेबलिंग का मामला नहीं है, बल्कि FMCG सेक्टर में कंपनी की ग्रोथ और रेगुलेटरी चुनौतियों को समझने का मौका है। यदि अदालत का फैसला कंपनी के पक्ष में नहीं आता है, तो ब्रांडिंग और पैकेजिंग बदलने में होने वाला अतिरिक्त खर्च कंपनी के मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। शेयरधारकों को अब कोर्ट की अगली सुनवाई और मैनेजमेंट द्वारा दी जाने वाली जानकारी पर पैनी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि FMCG बिजनेस Reliance के अगले बड़े ग्रोथ इंजन के रूप में देखा जा रहा है।
