Red Bull ने FSSAI के उस हालिया आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें 'Energy Drink' शब्द के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया गया है। रेगुलेटर के मुताबिक अब इसे केवल 'Caffeinated Beverage' कहा जाएगा, जिससे कंपनियों पर री-पैकेजिंग और मार्केटिंग का बड़ा बोझ आ सकता है।
रेगुलेटर FSSAI ने 1 जुलाई को एक सख्त निर्देश जारी किया था, जिसके तहत कंपनियों को अपने उत्पादों से 'Energy Drink' नाम हटाकर उसे 'Caffeinated Beverage' में बदलना होगा। इसके लिए कंपनियों को 90 दिन का समय दिया गया है। Red Bull का तर्क है कि FSSAI ने यह फैसला बिना किसी पूर्व चेतावनी या 'Show-cause notice' के लिया है, जो प्रक्रिया के लिहाज से गलत है।
कंपनियों और रेगुलेटर के बीच बढ़ता तनाव
इस मामले में सिर्फ Red Bull ही नहीं, बल्कि पूरा बेवरेज सेक्टर फंसा हुआ है। Indian Beverage Association ने भी सवाल उठाए हैं क्योंकि अप्रैल 2024 में FSSAI ने खुद 'Caffeinated Beverages' कैटेगरी के तहत 'Energy Drink' नाम के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। ऐसे में अचानक आए इस यू-टर्न (U-turn) से मार्केट में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
क्या है रिस्क और मार्केट का असर?
कुछ कंपनियां, जैसे PepsiCo अपने ब्रांड 'Sting' के लिए पैकेजिंग बदलने में जुट गई हैं, लेकिन ब्रांडिंग और मार्केटिंग में किए गए भारी निवेश का क्या होगा? अगर कोर्ट का फैसला कंपनियों के खिलाफ जाता है, तो उन्हें री-पैकेजिंग, प्रिंटिंग और इन्वेंट्री मैनेजमेंट पर बड़ा खर्च करना पड़ेगा। रिटेल निवेशकों को इस केस पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि रेगुलेटरी बदलाव का सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी पर पड़ सकता है।
