गल्फ एक्सपोर्ट में लौटी बहार
Radico Khaitan का इंटरनेशनल बिजनेस एक बड़ी राहत महसूस कर रहा है। मार्च-अप्रैल में क्षेत्रीय संघर्ष के कारण ठप्प पड़े गल्फ देशों के एक्सपोर्ट को कंपनी ने अप्रैल के अंत में फिर से शुरू कर दिया है। इस रिकवरी और अफ्रीका व एशिया-पैसिफिक में शानदार प्रदर्शन के दम पर कंपनी का एक्सपोर्ट सेल्स फाइनेंशियल ईयर 2026 (31 मार्च 2026 को समाप्त) के लिए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
दमदार फाइनेंशियल्स और ग्रोथ का भरोसा
FY26 के लिए ₹6,050.4 करोड़ का नेट रेवेन्यू और पिछले साल के 13.8% से बढ़कर 16.8% हुआ EBITDA मार्जिन, कंपनी के मजबूत फाइनेंशियल्स का सबूत हैं। इस परफॉर्मेंस में सबसे बड़ा योगदान प्रीमियम सेगमेंट (higher-value spirits) की ओर ग्राहकों के बढ़ते झुकाव का है, जिसके अगले फाइनेंशियल ईयर (FY27) में भी जारी रहने की उम्मीद है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि FY27 में रेवेन्यू में 15% से ज्यादा की ग्रोथ और मार्जिन में 120-125 बेसिस पॉइंट्स का विस्तार होगा। इसकी वजह है 'प्रीमियमाइजेशन' यानी ग्राहकों का महंगे और प्रीमियम ड्रिंक्स की ओर बढ़ना, जिसने Radico के 'Prestige & Above' पोर्टफोलियो को कंपनी के कुल इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) वॉल्यूम का 45.6% बना दिया है।
वैल्यूएशन और बढ़ती लागत की टेंशन
Radico Khaitan का शेयर फिलहाल अपने पीयर ग्रुप (peers) के मुकाबले काफी महंगा है। कंपनी का वैल्यूएशन (trailing P/E) करीब 75x है, जो इसके ग्रोथ आउटलुक, खासकर प्रीमियम स्ट्रैटेजी में निवेशकों के मजबूत भरोसे को दिखाता है। तुलनात्मक रूप से, United Spirits करीब 58x P/E पर और ग्लोबल दिग्गज Pernod Ricard करीब 12x P/E पर ट्रेड कर रहे हैं। हालांकि, कंपनी की ग्रोथ स्ट्रैटेजी पर निवेशकों का भरोसा कायम है, लेकिन मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) ने सप्लाई चेन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और इनपुट कॉस्ट (input costs) को भी महंगा कर दिया है। कांच की बोतलों, माल ढुलाई (freight) और क्रूड ऑयल डेरिवेटिव्स जैसी चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, जिसका असर पूरे FMCG सेक्टर पर दिख रहा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि अल्कोहलिक बेवरेज सेक्टर में पैकेजिंग लागत बढ़ने से मार्जिन में 150-200 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आ सकती है।
