दुनिया भर में शराब बाज़ार में गिरावट के बीच, भारतीय बाज़ार में तेज़ी देखी जा रही है। इस बढ़त में Radico Khaitan सबसे आगे है, जिसके 8 ब्रांड्स हर साल 10 लाख से ज़्यादा केस बेच रहे हैं। कंपनी प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस करके अपने कॉम्पिटिटर्स से आगे निकल रही है।
क्या है ख़ास?
दुनिया भर में जहां स्पिरिट्स मार्केट में 2% की गिरावट देखी गई, वहीं भारत में 4% की ज़बरदस्त ग्रोथ दर्ज की गई। इसी के साथ, भारत 2032 तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अल्कोहल मार्केट बनने की राह पर है। इस तेज़ी का फायदा उठाते हुए, Radico Khaitan ने अपनी स्थिति और मज़बूत की है। कंपनी के 8 ऐसे ब्रांड्स हैं जो हर साल 10 लाख से ज़्यादा केस की बिक्री करते हैं। यह संख्या किसी भी भारतीय कंपनी के लिए सबसे ज़्यादा है, और यह Radico Khaitan को ग्लोबल प्लेयर्स की कतार में खड़ा करती है।
प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर दांव
Radico Khaitan की इस शानदार परफॉरमेंस का मुख्य कारण है कंपनी का प्रीमियम प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ना। कंपनी ने एंट्री-लेवल सेगमेंट से आगे बढ़कर महंगे प्रोडक्ट्स पर फोकस किया है। इसी स्ट्रेटेजी की वजह से कंपनी की ब्रांड वैल्यू और मार्केट शेयर में इज़ाफ़ा हुआ है, और इसने बड़े घरेलू कॉम्पिटिटर्स को पीछे छोड़ दिया है। ज़्यादा मार्जिन वाले ब्रांड्स पर ध्यान केंद्रित करके, कंपनी प्राइस-सेंसिटिव लो-एंड मार्केट से निकलने की कोशिश कर रही है।
एनालिस्ट्स की नज़र और भविष्य की उम्मीदें
FY26 के नतीजों के बाद, Radico Khaitan को एनालिस्ट्स से पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला है। Nuvama Institutional Equities का कहना है कि कंपनी की बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ने की काबिलियत उसके प्रीमियम पोर्टफोलियो के एक्सपेंशन से जुड़ी है। वहीं, JM Financial जैसी ब्रोकरेज फर्म्स ने FY27 के लिए 15% सेल्स ग्रोथ और 22% EBITDA ग्रोथ का अनुमान लगाया है। यह अनुमान कंपनी की मौजूदा परफॉरमेंस और एक्सपेंशन प्लान को सही ढंग से लागू करने की क्षमता पर आधारित हैं।
जोखिम और चुनौतियां
भारत में शराब का कारोबार कुछ खास जोखिमों से भरा है। अल्कोहल एक स्टेट सब्जेक्ट है, यानी हर राज्य के अपने नियम हैं। ऐसे में, एक्साइज ड्यूटी, टैक्सेशन या डिस्ट्रीब्यूशन पॉलिसी में अचानक होने वाले बदलाव कंपनी के सेल्स और प्रॉफिट मार्जिन पर असर डाल सकते हैं। इसके अलावा, कंपनी के लिए एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) और अनाज जैसी रॉ-मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी एक बड़ा जोखिम है। अगर ये कीमतें बढ़ती हैं और कंपनी ग्राहकों से ज़्यादा कीमत नहीं वसूल पाती, तो प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आगे चलकर, निवेशकों को वॉल्यूम ग्रोथ और मार्जिन एक्सपेंशन की स्थिरता पर ध्यान देना होगा। इसमें यह देखना ज़रूरी होगा कि कंपनी United Spirits जैसे प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले अपनी मार्केट शेयर कैसे बनाए रखती है। साथ ही, राज्यों के पॉलिसी बदलावों का एक्साइज ड्यूटी पर क्या असर पड़ता है और रॉ-मटेरियल की कीमतों का ट्रेंड कैसा रहता है, यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा। नए प्रीमियम लॉन्च से कंपनी के रेवेन्यू मिक्स में कितना योगदान मिलता है, यह मैनेजमेंट की कमेंट्री से पता चलेगा।
