क्विक कॉमर्स का दायरा तेजी से बढ़कर अब **477** शहरों तक पहुंच चुका है। डार्क स्टोर्स के बढ़ते नेटवर्क के कारण स्थानीय किराना दुकानों का बिजनेस **25%** तक घट गया है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
क्विक कॉमर्स की आक्रामक विस्तार नीति ने भारतीय रिटेल सेक्टर की तस्वीर बदल दी है। अगस्त 2026 तक, इन प्लेटफॉर्म्स ने 477 शहरों में अपने डार्क स्टोर्स का जाल बिछा लिया है। लोग अब किराने के सामान के लिए 10 मिनट वाली डिलीवरी को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसका सीधा असर पारंपरिक किराना दुकानों पर पड़ा है।
बाजार में कड़ी टक्कर
इस सेक्टर में Blinkit फिलहाल 34% मार्केट शेयर के साथ सबसे आगे है, जिसके पास प्रमुख शहरी बाजारों में 969 स्टोर्स हैं। वहीं, Flipkart Minutes ने भी बड़ा उछाल मारते हुए Swiggy Instamart को पीछे छोड़ दिया है। Flipkart Minutes के पास अब 627 स्टोर्स हैं, जबकि Swiggy Instamart के पास 615 स्टोर्स हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि FMCG सामानों तक पहुंचने का तरीका अब बदल रहा है।
रियल एस्टेट की जंग और जोखिम
क्विक कॉमर्स कंपनियां अब रिहायशी इलाकों में प्राइम लोकेशंस के लिए किराना दुकानदारों से मुकाबला कर रही हैं। ये कंपनियां बाजार भाव से 2 से 3 गुना ज्यादा किराया देने को तैयार हैं, जिससे छोटे दुकानदारों के लिए अपनी दुकान चलाना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, ट्रैफिक और शोर को लेकर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWA) की आपत्तियों के चलते इन प्लेटफॉर्म्स पर रेगुलेटरी दबाव भी बढ़ रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशक अब यह देख रहे हैं कि क्या ये कंपनियां सिर्फ 'ग्रोथ' पर ध्यान देंगी या 'मुनाफे' (Profitability) की ओर बढ़ेंगी। हाई कैश बर्न और बढ़ती ऑपरेशनल लागत आने वाले समय में इन प्लेटफॉर्म्स के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं।
