प्रॉफिट की ओर बढ़े प्लेटफॉर्म्स, D2C ब्रांड्स पर बढ़ा दबाव
क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) प्लेटफॉर्म्स पर अब अपने निवेशकों को खुश करने का दबाव बढ़ गया है। ये कंपनियां सिर्फ ग्रोथ (Growth) पर फोकस करने की बजाय सस्टेनेबल प्रॉफिट (Sustainable Profit) पर जोर दे रही हैं। इसका सीधा असर D2C ब्रांड्स पर दिख रहा है, जो इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपने बिजनेस को ऑपरेट करते हैं।
कमीशन और विज्ञापन का बोझ
Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स से D2C ब्रांड्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इन कंपनियों ने ऑनबोर्डिंग (Onboarding) सख्त कर दी है और कमीशन (Commission) की दरें बढ़ा दी हैं। अब ये ब्रांड्स से उनके रेवेन्यू (Revenue) का 8-15% तक कमीशन ले रहे हैं, और कुल मिलाकर प्लेटफॉर्म पर लगने वाला खर्च बिक्री मूल्य (Selling Price) का 35% से भी ज्यादा हो सकता है। साथ ही, प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पहचान बनाने के लिए अब ब्रांड्स को विज्ञापन (Advertising) पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है, जो पहले ऑप्शनल (Optional) होता था। खास तौर पर, विज्ञापन खर्च अब ब्रांड के ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) का 10-15% तक पहुंच रहा है।
मार्केट में बदलती चाल
भारतीय क्विक कॉमर्स मार्केट, जिसका अनुमान $3.65 बिलियन (2026) से बढ़कर $6.64 बिलियन (2031) होने की उम्मीद है, एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। Blinkit करीब 45% मार्केट शेयर के साथ लीड कर रहा है, जिसके बाद Swiggy Instamart (27%) और Zepto (21%) का नंबर आता है। ये कंपनियां भले ही रेवेन्यू में ग्रोथ दिखा रही हों, लेकिन अब सारा फोकस प्रॉफिटेबल ग्रोथ (Profitable Growth) पर है। निवेशक उन कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनकी यूनिट इकोनॉमिक्स (Unit Economics) मजबूत हो और प्रॉफिट कमाने की स्पष्ट योजना हो।
ब्रांड्स और प्लेटफॉर्म्स के लिए जोखिम
यह स्थिति क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और उन पर निर्भर D2C ब्रांड्स, दोनों के लिए जोखिम भरी है। कई क्विक कॉमर्स कंपनियां अभी भी भारी घाटे में हैं। उदाहरण के लिए, Zepto का फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) के लिए नेट लॉस (Net Loss) बढ़कर ₹3,367.3 करोड़ हो गया है। कंपनियां हमेशा वेंचर कैपिटल (Venture Capital) पर निर्भर नहीं रह सकतीं। D2C ब्रांड्स के लिए, कमीशन, डिलीवरी फीस, स्टोरेज और विज्ञापन जैसे बढ़ते खर्चे बिक्री को अनप्रॉफिटेबल (Unprofitable) बना सकते हैं, भले ही बिक्री की मात्रा (Volume) ज्यादा हो। इस दबाव के चलते D2C ब्रांड्स अब तेजी से नए ग्राहक बनाने की रणनीति से हटकर मौजूदा ग्राहकों को बनाए रखने पर ध्यान दे रहे हैं।
भविष्य की राह
एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि क्विक कॉमर्स स्पेस में और भी बदलाव देखने को मिलेंगे, जिसमें स्मार्ट स्ट्रैटेजी (Smart Strategy) और लगातार ग्रोथ पर फोकस बढ़ेगा। प्लेटफॉर्म्स अपनी इन्वेंट्री (Inventory) और रूट प्लानिंग (Route Planning) को बेहतर बनाने के लिए AI जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकते हैं। D2C ब्रांड्स के लिए, भविष्य में सफलता यूनिट इकोनॉमिक्स, प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) और कस्टमर रिटेंशन (Customer Retention) पर गहरी नजर रखने से ही मिलेगी। यह देखना बाकी है कि यह कन्वीनियंस (Convenience) का मॉडल प्लेटफॉर्म्स और ब्रांड्स, दोनों के लिए फाइनेंशियली सस्टेनेबल (Financially Sustainable) साबित होता है या नहीं।