FMCG कंपनियों में मची खलबली! Quick Commerce के चलते लॉन्च टाइम घटा, अब हफ्तों में आ रहे नए प्रोडक्ट्स

CONSUMER-PRODUCTS
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
FMCG कंपनियों में मची खलबली! Quick Commerce के चलते लॉन्च टाइम घटा, अब हफ्तों में आ रहे नए प्रोडक्ट्स

भारत में क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) का बोलबाला बढ़ गया है। बड़े कंज्यूमर गुड्स (FMCG) कंपनियों के लिए नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने का समय अब सालों से घटकर कुछ हफ्तों का रह गया है। Blinkit और Zepto जैसे प्लेटफॉर्म्स अब डिजिटल बिक्री का **75%** तक हिस्सा चला रहे हैं, जिससे कंपनियों को तुरंत कंज्यूमर की मांग पूरी करने के लिए नए प्रोडक्ट्स पर फोकस करना पड़ रहा है।

10 मिनट वाली डिलीवरी का कमाल

10 मिनट में डिलीवरी देने वाले प्लेटफॉर्म्स ने भारत की बड़ी कंज्यूमर गुड्स कंपनियों के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव ला दिया है। पहले जहां नए प्रोडक्ट्स को टेस्ट करने और लॉन्च करने में 12 महीने तक लग जाते थे, अब यह समय घटकर सिर्फ 2 से 4 हफ्तों का रह गया है। यह सब क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जैसे Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart की बढ़ती ताकत के कारण हो रहा है।

फोरकास्टिंग से रियल-टाइम डेटा की ओर

हालिया नतीजों से पता चला है कि ये प्लेटफॉर्म्स अब FMCG कंपनियों की कुल डिजिटल बिक्री का लगभग 75% हिस्सा संभाल रहे हैं। इस बदलाव से कंपनियां अब सिर्फ पुराने सेल्स डेटा पर निर्भर नहीं हैं। वे अब रोज़ाना की बिक्री के आंकड़ों और रियल-टाइम डेटा का इस्तेमाल करके कंज्यूमर ट्रेंड्स को समझ रही हैं, स्टॉक एडजस्ट कर रही हैं और तुरंत जरूरत वाले प्रोडक्ट्स लॉन्च कर रही हैं।

इनोवेशन और डिस्ट्रीब्यूशन पर असर

Tata Consumer Products जैसी बड़ी कंपनियों के मैनेजिंग डायरेक्टर्स का कहना है कि जो इनोवेशन साइकिल कभी 1 साल तक चलता था, वह अब 3 से 6 महीने का हो गया है, और इसे और कम करने के टारगेट हैं। यह फुर्ती सिर्फ पुराने प्रतिद्वंद्वियों से ही नहीं, बल्कि डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) और छोटी रीजनल कंपनियों से भी मुकाबला करने के लिए जरूरी है। इन प्लेटफॉर्म्स पर सीधे प्रोडक्ट्स टेस्ट करने से लंबे समय तक स्टॉक जमा होने का खतरा भी कम हो जाता है।

बदलता कंज्यूमर बिहेवियर

भारत में कंज्यूमर अब प्लान करके हफ्ते भर का सामान खरीदने के बजाय, तुरंत जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं। जैसे सुबह नाश्ते का सामान या रात में स्नैक्स। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि इडली/डोसा बैटर जैसे प्रोडक्ट्स इस बदलाव के बड़े उदाहरण हैं, जहां तुरंत उपलब्धता ने घर में पहले से प्लानिंग की जरूरत को खत्म कर दिया है। कंपनियां अब हर पिन-कोड की डिमांड को पूरा करने के लिए अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को बदल रही हैं, और शहरी यूजर्स की जरूरत के हिसाब से कीमत और पैकेजिंग तय कर रही हैं।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

निवेशकों को यह देखना होगा कि इन घटते लॉन्च टाइम और प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती निर्भरता से प्रॉफिट मार्जिन पर क्या असर पड़ता है। हालांकि, तेजी से लॉन्च करने से मार्केट शेयर तो मिल सकता है, लेकिन क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जुड़े मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के खर्चे भी बढ़ जाते हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या कंपनियां इन प्लेटफॉर्म्स पर डिस्काउंटिंग के बीच अपने ग्रॉस मार्जिन को बनाए रख पाती हैं। इसके अलावा, कुछ चुनिंदा डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा निर्भरता एक नया जोखिम पैदा कर सकती है, जिसका असर भविष्य में प्राइसिंग पावर और प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.