Puma India ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब कंपनी भारी डिस्काउंट की जगह प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही है और अपनी रिटेल मौजूदगी को घटा रही है। इस बदलाव के तहत, कंपनी करीब 20 से 25 कम प्रदर्शन करने वाले स्टोर्स को बंद कर देगी।
प्रीमियम सेगमेंट पर Puma India का दांव
Puma India के नए मैनेजिंग डायरेक्टर रामप्रसाद श्रीधरन (Ramprasad Sridharan), जिन्होंने दिसंबर 2025 में यह पद संभाला है, कंपनी को एक नई दिशा दे रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि Puma India डिस्काउंट पर निर्भर रहने की अपनी पुरानी रणनीति से बाहर निकले और एक प्रीमियम बिजनेस मॉडल की ओर बढ़े। इसी के तहत, कंपनी अपने रिटेल फुटप्रिंट को समेट रही है और लगभग 20 से 25 ऐसे स्टोर्स को बंद करने जा रही है, जो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। कंपनी का इरादा अब कम, लेकिन बड़े और बेहतर लोकेशंस वाले स्टोर्स पर ध्यान केंद्रित करना है, ताकि ग्राहकों को बेहतर शॉपिंग अनुभव मिल सके।
किन कैटेगरी पर होगा फोकस?
इस नई रणनीति को सफल बनाने के लिए, Puma India खास ग्रोथ कैटेगरी पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। भारत में 'रनिंग' (Running) फिलहाल ब्रांड की सबसे बड़ी कैटेगरी है, जो रिटेल बिक्री में लगभग 30% का योगदान देती है। इसके अलावा, कंपनी हाइब्रिड फिटनेस सेगमेंट में भी विस्तार कर रही है, जिसमें ग्लोबल फिटनेस कंपटीशन ब्रांड Hyrox के साथ पार्टनरशिप शामिल है। साथ ही, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (Royal Challengers Bengaluru) जैसी टीम स्पोर्ट्स एसोसिएशन्स का फायदा उठाना जारी रहेगा।
ग्लोबल लॉन्च के साथ सिंक्रोनाइजेशन
एक और अहम कदम यह है कि Puma India अपने प्रोडक्ट्स के ग्लोबल लॉन्च को लोकल मार्केट के साथ सिंक कर रही है। इसका मतलब है कि जो नए प्रोडक्ट्स दुनिया भर में लॉन्च होंगे, वे अब भारत में भी उसी समय उपलब्ध होंगे। इससे भारतीय ग्राहक, जो स्पेशलाइज्ड फुटवियर और अपैरल की तलाश में हैं, उन्हें तुरंत एक्सेस मिलेगा। ऑपरेशनल लेवल पर भी कंपनी ने लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाई है, जो 2023 में करीब 49% थी, अब बढ़कर लगभग 75% हो गई है।
ग्लोबल चुनौतियाँ और पेरेंट कंपनी का हाल
हालांकि Puma India अपनी रणनीति से प्रॉफिटेबिलिटी और ब्रांड पोजिशनिंग को बेहतर बनाना चाहती है, लेकिन यह सब कंपनी की जर्मन पेरेंट कंपनी Puma SE के लिए एक चुनौतीपूर्ण माहौल में हो रहा है। Puma SE, जिसे वह 2026 को 'ट्रांजिशन ईयर' बता रही है, वैश्विक स्तर पर बिक्री में गिरावट का सामना कर रही है। 2026 की दूसरी तिमाही में, करेंसी एडजस्टेड बिक्री में 9.4% की गिरावट दर्ज की गई थी।
पेरेंट कंपनी ने ग्रॉस मार्जिन में सुधार और ऑपरेटिंग लॉस में कमी तो दिखाई है, लेकिन 2026 के लिए अनुमान सतर्क बने हुए हैं। कंपनी को बिक्री में लगातार गिरावट और निगेटिव ऑपरेटिंग रिजल्ट्स की उम्मीद है। इस ग्लोबल परिदृश्य में, Indian यूनिट का प्रीमियम-फोकस्ड अप्रोच के जरिए मार्जिन सुधारने का प्रयास महत्वपूर्ण हो जाता है। Puma SE एक ग्लोबल रीस्ट्रक्चरिंग प्लान भी चला रही है, जिसके तहत लगभग 13% वर्कफोर्स में कटौती की जाएगी।
कॉम्पिटिशन और भविष्य
भारत का स्पोर्ट्सवियर मार्केट बेहद कॉम्पिटिटिव हो गया है। Puma को न केवल मास-मार्केट ब्रांड्स से, बल्कि Nike, Adidas, Hoka, On, और Asics जैसे ग्लोबल प्रीमियम प्लेयर्स से भी कड़ी टक्कर मिल रही है।
कंपनी के अगले कदम अहम होंगे। निवेशक यह देखेंगे कि स्टोर कंसॉलिडेशन और प्रीमियम प्रोडक्ट मिक्स, मुश्किल ग्लोबल आर्थिक हालातों के बावजूद, लाभ मार्जिन को सफलतापूर्वक बढ़ाने में कितना कामयाब होता है। यह भी देखना अहम होगा कि कंपनी छूट की मात्रा और गहराई को कम करते हुए बिक्री वृद्धि कैसे बनाए रखती है, क्योंकि इन हाई-प्राइस्ड प्रोडक्ट्स की डिमांड इकोनॉमिक माहौल के प्रति संवेदनशील है।
