Protein Food Boom: प्रोटी-युक्त फूड के दावों पर उठे सवाल, कंपनियों के लिए संकट का दौर

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AuthorAditya Rao|Published at:
Protein Food Boom: प्रोटी-युक्त फूड के दावों पर उठे सवाल, कंपनियों के लिए संकट का दौर

वेट लॉस दवाओं के दौर में प्रोटीन फूड की डिमांड में तेजी तो आई है, लेकिन अब इनके लेबल पर किए गए दावों को लेकर ग्राहकों का भरोसा डगमगा रहा है।

बाजार में मची हलचल

प्रोटीन-एनरिच्ड फूड का ग्लोबल मार्केट फिलहाल $58 अरब के आसपास पहुंच चुका है। Ozempic और Mounjaro जैसी वेट-लॉस दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल ने ऐसे ग्राहकों की फौज तैयार कर दी है जो मसल्स मास बनाए रखने के लिए हाई-प्रोटीन डाइट को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी डिमांड को भुनाने के लिए कंपनियां धड़ाधड़ नए प्रोडक्ट्स लॉन्च कर रही हैं।

'अकाउंटेबिलिटी एरा' की शुरुआत

अब ग्राहक जागरूक हो चुके हैं। डिजिटल ऐप्स के जरिए पैकेट पर लिखे दावों की पड़ताल की जा रही है। मार्केट रिसर्च से पता चला है कि कई 'हाई-प्रोटीन' प्रोडक्ट्स असल में भारी-भरकम एडिटिव्स और सर्विंग साइज के साथ छेड़छाड़ कर बेचे जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन प्रोसेस्ड स्नैक्स के मुकाबले नेचुरल होल-फूड कहीं ज्यादा बेहतर हैं।

कंपनियों की बदलती रणनीति

निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि कंपनियां दो गुटों में बंट रही हैं। एक तरफ वे कंपनियां हैं जो सिर्फ प्रोटीन ग्राम की संख्या बढ़ाकर सेल्स बढ़ाना चाहती हैं, वहीं दूसरी तरफ Hormel Foods जैसी कंपनियां 'क्लीन लेबल' पर फोकस कर रही हैं, जो मिनिमली प्रोसेस्ड इंग्रीडिएंट्स को प्राथमिकता दे रही हैं।

कानूनी पचड़ों में दिग्गज

यह विवाद अब कानूनी गलियारों तक पहुंच चुका है। डेयरी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Danone ने तो अपने प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ प्रोटीन लेबलिंग और सर्विंग साइज मानकों में गड़बड़ी को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह 'हेल्थ-वॉशिंग' के खिलाफ एक बड़ा कदम है जो कंज्यूमर ट्रस्ट को बचाने की कोशिश है।

शेयरहोल्डर्स को यह समझना होगा कि भविष्य में वही कंपनियां जीतेंगी जो मार्केटिंग के शोर के बजाय प्रोडक्ट की क्वालिटी और ट्रांसपेरेंसी पर ध्यान देंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.