FSSAI Warning Labels: पैकेज्ड फूड पर लग सकता है 'हेल्थ अलर्ट', 94% प्रोडक्ट्स पर होगा असर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
FSSAI Warning Labels: पैकेज्ड फूड पर लग सकता है 'हेल्थ अलर्ट', 94% प्रोडक्ट्स पर होगा असर

FSSAI के नए नियमों के तहत **94%** पैकेज्ड फूड को वार्निंग लेबल की जरूरत पड़ सकती है। मार्केट में बड़ी हलचल को देखते हुए एक्सपर्ट्स ने **2027** से फेज्ड इम्प्लीमेंटेशन की मांग की है।

भारत में 'फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग' (FoPL) को लेकर बहस तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अगर मौजूदा कड़े मानकों को तुरंत लागू किया गया, तो सर्वे में शामिल 44,109 फूड प्रोडक्ट्स में से करीब 94% पर वार्निंग लेबल लगाना होगा। 'फूड फ्यूचर फाउंडेशन' की रिपोर्ट बताती है कि हर पैकेट पर चेतावनी होने से ग्राहक इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर सकते हैं, जिसे एक्सपर्ट्स 'लेबल सैचुरेशन' कह रहे हैं।

क्या है बदलाव का रोडमैप?

FSSAI के पूर्व चीफ पवन कुमार अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट से इसे किस्तों में लागू करने की अपील की है। प्रस्ताव के अनुसार, 1 जुलाई 2027 से अनिवार्य अनुपालन शुरू होना चाहिए। इस योजना में शुरुआत में कम सख्त लिमिट्स रखी जाएंगी और अगले 3 से 5 वर्षों में इन्हें धीरे-धीरे कड़ा किया जाएगा, ताकि कंपनियों को अपने फॉर्मूलेशन बदलने का पर्याप्त समय मिल सके।

FMCG सेक्टर पर क्या होगा असर?

निवेशकों को इस पॉलिसी पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि स्नैक्स, बिस्कुट और ड्रिंक्स के ब्रांड पर अनिवार्य 'चेतावनी' से कंज्यूमर बिहेवियर बदल सकता है। कंपनियों की R&D लागत बढ़ सकती है और ब्रांड की इमेज पर भी असर पड़ सकता है।

बहस का एक बड़ा हिस्सा तकनीकी मानकों पर भी है। इंडस्ट्री का कहना है कि कुल चीनी के बजाय 'एडेड शुगर' और कुल फैट के बजाय 'सैचुरेटेड फैट' पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि कंपनियां चेतावनी से बचने के लिए आर्टिफीसियल स्वीटनर्स या प्रिजर्वेटिव्स का अत्यधिक उपयोग न करें। फिलहाल, अंतिम फैसला कोर्ट और रेगुलेटर्स के हाथ में है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.