भारत की दिग्गज शराब कंपनियां, Radico Khaitan और United Breweries के लिए दूसरी तिमाही बेहद शानदार रही है। ग्राहक अब महंगे ब्रांड्स की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सीधा फायदा इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को मिल रहा है। हालांकि, मार्केटिंग के भारी खर्च के चलते Allied Blenders जैसी कुछ कंपनियों पर दबाव भी दिख रहा है।
भारत में शराब के शौकीनों की पसंद बदल रही है। आजकल ग्राहक सस्ते ब्रांड्स को छोड़कर प्रीमियम उत्पादों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसे इंडस्ट्री में 'प्रीमियमइज़ेशन' (Premiumization) कहा जा रहा है। इस चलन ने कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बड़ा असर डाला है।
Radico Khaitan का दमदार प्रदर्शन
Radico Khaitan के सितंबर तिमाही के नतीजे बताते हैं कि कंपनी के 'Prestige & Above' कैटेगरी की सेल्स वॉल्यूम में 35.8% का इजाफा हुआ है, जबकि स्टैंडर्ड कैटेगरी की बिक्री 9.7% घट गई है। कंपनी का नेट प्रॉफिट 66% उछलकर ₹232 करोड़ पर पहुंच गया है, जबकि कुल इनकम 10% बढ़कर ₹5,588 करोड़ रही। अब कंपनी के कुल रेवेन्यू में प्रीमियम प्रोडक्ट्स का हिस्सा 77% से ज्यादा है।
बियर मार्केट में भी तेजी
United Breweries ने भी इस ट्रेंड का पूरा फायदा उठाया है। कंपनी की कुल वॉल्यूम 16% बढ़ी, लेकिन प्रीमियम बियर सेगमेंट में यह उछाल 38% रहा। Heineken Silver और Kingfisher Ultra जैसे ब्रांड्स के दम पर कंपनी का मुनाफा पिछले साल के मुकाबले लगभग तीन गुना बढ़कर ₹135 करोड़ हो गया है।
चुनौतियां और नीतिगत बदलाव
हालांकि, प्रीमियम मार्केट में धाक जमाना आसान नहीं है। Allied Blenders and Distillers ने 10 मिलियन केस की बिक्री का आंकड़ा तो पार कर लिया, लेकिन मार्केटिंग पर भारी खर्च के चलते ऑपरेटिंग मार्जिन 12.4% तक सिमट गया। प्रॉफिट ग्रोथ केवल 10% रही।
इसके अलावा, कर्नाटक में शराब पर ड्यूटी कम करने के सरकारी फैसले ने भी इन कंपनियों के लिए 'ग्रोथ इंजन' का काम किया है। जहां Radico Khaitan ने इस राज्य में प्रीमियम पोर्टफोलियो में 120% की ग्रोथ दर्ज की, वहीं United Breweries के लिए भी कर्नाटक मार्केट शेयर बढ़ाने का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।
