Popees Baby Care: ₹511 करोड़ की डील के बाद देशभर में विस्तार की तैयारी, क्या सफल होगा यह दांव?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Popees Baby Care: ₹511 करोड़ की डील के बाद देशभर में विस्तार की तैयारी, क्या सफल होगा यह दांव?

दक्षिण भारत में अपनी मजबूत पकड़ के बाद अब Popees Baby Care Products ने पूरे भारत में विस्तार करने का प्लान बनाया है। कंपनी ने हाल ही में **₹511.33 करोड़** की शेयर-स्वैप डील पूरी की है और वित्त वर्ष **2026** में **₹161.93 करोड़** का रेवेन्यू दर्ज किया है।

बड़े विस्तार की तैयारी

करीब दो दशकों तक मुख्य रूप से दक्षिण भारत तक सीमित रहने के बाद, Popees Baby Care ने अब अपनी नजरें पूरे देश के बाजार पर टिका दी हैं। कंपनी ने अपनी लिस्टेड एंटिटी (पूर्व में Hari Govind International) के जरिए एक आक्रामक नेशनल एक्सपेंशन स्ट्रेटेजी बनाई है ताकि देश भर के परिवारों तक अपनी पहुंच बढ़ाई जा सके।

फाइनेंशियल हेल्थ और मुनाफे का ग्राफ

कंपनी के हालिया नतीजे उम्मीद जगाने वाले हैं। वित्त वर्ष 2026 में Popees ने ₹161.93 करोड़ का रेवेन्यू कमाया, जो पिछले साल के ₹135.30 करोड़ से कहीं अधिक है। इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹8.37 करोड़ रहा। यह मजबूत बैलेंस शीट कंपनी को नए सेल्स चैनल्स और मार्केटिंग में निवेश करने का आत्मविश्वास दे रही है।

₹511 करोड़ की मेगा डील

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा ट्रिगर ₹511.33 करोड़ की शेयर-स्वैप डील है। इसके जरिए लिस्टेड कंपनी ने Popees Baby Care Products के ऑपरेटिंग बिजनेस में 99.31% हिस्सेदारी हासिल की है। मैनेजिंग डायरेक्टर शाजू थॉमस के मुताबिक, यह इंटीग्रेशन कंपनी को बड़े स्तर पर ऑपरेट करने के लिए एक मजबूत प्लेटफार्म देगा। कंपनी डायपर, शिशु के कपड़े, मेटरनिटी वियर और फुटवियर जैसे सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करेगी।

मैन्युफैक्चरिंग क्षमता

फिलहाल कंपनी के पास केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में तीन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। इनकी कुल उत्पादन क्षमता लगभग 9 लाख गारमेंट सेट्स प्रति माह है। अच्छी बात यह है कि फिलहाल कंपनी को नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए भारी निवेश की जरूरत नहीं है, क्योंकि मौजूदा क्षमता विस्तार के लिए काफी है।

निवेशकों के लिए चुनौतियां

हालांकि, भारत के किड्स-वियर मार्केट में मुकाबला बेहद कड़ा है। यहाँ पहले से ही कई बड़े रिटेलर्स और ऑनलाइन-फर्स्ट ब्रांड्स मौजूद हैं। नेशनल लेवल पर विस्तार के लिए भारी मार्केटिंग और लॉजिस्टिक्स खर्च करने होंगे, जिससे मुनाफे के मार्जिन पर दबाव आ सकता है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कंपनी नॉर्थ, वेस्ट और ईस्ट इंडिया में मौजूदा दिग्गजों के सामने खुद को स्थापित कर पाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.