Q4 में मुनाफे का धमाका, लेकिन मार्जिन पर महंगाई का दबाव
Pidilite Industries ने चौथी तिमाही में शानदार परफॉर्मेंस का प्रदर्शन किया है। कंपनी का रेवेन्यू 14.1% बढ़कर ₹3,583.4 करोड़ हो गया, जबकि कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 37.16% उछलकर ₹579.27 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी के कंज्यूमर और बाजार सेगमेंट में 15.4% की वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की गई, जिसने EBITDA मार्जिन को 20.6% से बढ़ाकर 23.4% कर दिया। इस प्रदर्शन के दम पर एनालिस्ट्स ने आने वाले फाइनेंशिल इयर्स के लिए EPS अनुमानों को भी बढ़ाया है।
बढ़ती लागतों के बीच मार्जिन बनाए रखने की चुनौती
हालांकि, इन सकारात्मक नतीजों के बीच कंपनी के सामने लागत बढ़त की बड़ी चुनौती आ गई है। पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन (geopolitical tensions) के कारण कच्चे माल, खासकर क्रूड-लिंक्ड आइटम जैसे Vinyl Acetate Monomer (VAM) की कीमतें 40-50% तक बढ़ गई हैं। Pidilite को लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने के लिए कीमतों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है, जिससे मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। कंपनी का लक्ष्य EBITDA मार्जिन को 20-24% की रेंज में बनाए रखना है, लेकिन बढ़ती लागतें इस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल बना रही हैं।
हाई वैल्यूएशन पर उठे सवाल
Pidilite Industries का शेयर अपने पीयर ग्रुप के मुकाबले प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड करता है। इसका मौजूदा P/E रेश्यो 60-70x के बीच है, जो Dabur India (43.8x) और Supreme Industries (49.05x) से काफी ज्यादा है, हालांकि यह Asian Paints (65.88x) और SRF Ltd (64.45x) के करीब है। पिछले एक साल में शेयर की कीमत में सिर्फ 8% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछले तीन सालों में कंपनी की कमाई औसतन 20% सालाना बढ़ी है। शेयर फिलहाल ₹1,476.00 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो इसके 52-सप्ताह के हाई (₹1,574.95) के करीब है।
एनालिस्ट्स का क्या है कहना?
अधिकांश एनालिस्ट्स (19 में से 14) Pidilite पर 'Buy' रेटिंग के साथ पॉजिटिव बने हुए हैं। उनका औसत प्राइस टारगेट ₹1,546.58 है, जिसमें Prabhudas Lilladher ने ₹1,729 का टारगेट दिया है। एनालिस्ट्स अगले 3 सालों के लिए कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ 10% सालाना और EPS ग्रोथ 12% CAGR रहने की उम्मीद कर रहे हैं।
मुख्य जोखिम
Pidilite के सामने सबसे बड़ा जोखिम इनपुट लागतों में लगातार बढ़ोतरी, कंपनी के हाई वैल्यूएशन पर दबाव और बढ़ती प्रतिस्पर्धा (जैसे Asian Paints का एडहेसिव मार्केट में विस्तार) है। क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ सकता है।
