Pernod Ricard India IPO: तूफानी ग्रोथ के बावजूद लिस्टिंग फ़िलहाल टली, ग्लोबल मंदी बनी वजह!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Pernod Ricard India IPO: तूफानी ग्रोथ के बावजूद लिस्टिंग फ़िलहाल टली, ग्लोबल मंदी बनी वजह!
Overview

Pernod Ricard के भारतीय कारोबार के लिए IPO (Initial Public Offering) की उम्मीदें फिलहाल थम गई हैं। कंपनी ने साफ कर दिया है कि वह अपने भारतीय यूनिट को अभी स्टॉक मार्केट में लिस्ट नहीं कराएगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत में कंपनी की सेल्स **4%** बढ़ी है, लेकिन वहीं ग्लोबल सेल्स में **5.9%** की गिरावट दर्ज की गई है।

भारत: कंपनी का ग्रोथ इंजन, पर IPO अभी दूर!

Pernod Ricard का भारतीय कारोबार वाकई में शानदार प्रदर्शन कर रहा है। देश में प्रीमियम और सुपर-प्रीमियम स्पिरिट्स की बढ़ती मांग के दम पर कंपनी के नेट सेल्स में 4% की बढ़ोतरी हुई है। यह कंपनी के ग्लोबल रेवेन्यू का 12-13% हिस्सा है, जो इसे एक अहम ग्रोथ इंजन बनाता है। हालांकि, यह चमक कंपनी के ग्लोबल सेल्स में आई 5.9% की गिरावट और बढ़ रहे कर्ज के सामने फीकी पड़ रही है, यही वजह है कि Pernod Ricard ने अपने भारतीय बिजनेस के IPO को फिलहाल 'नो' कह दिया है।

भारत: सबसे बड़ी एल्कोहॉलिक बेवरेज कंपनी

Pernod Ricard की भारतीय यूनिट देश की सबसे बड़ी एल्कोहॉलिक बेवरेज कंपनी के तौर पर अपनी पहचान बना चुकी है। फाइनेंशियल ईयर 25 (FY25) में, कंपनी की कंसोलिडेटेड बिक्री ₹27,445.80 करोड़ रही, जो Diageo India के ₹27,276 करोड़ से थोड़ी ज्यादा है। इस शानदार परफॉरमेंस का मुख्य कारण प्रीमियम और सुपर-प्रीमियम स्पिरिट्स की तरफ बढ़ता रुझान है। Chivas Regal और Glenlivet जैसे ब्रांड्स में डबल-डिजिट ग्रोथ देखी जा रही है। भारत की इकोनॉमी के 6% से ऊपर रहने और लोगों की बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम इस प्रीमियमलाइजेशन ट्रेंड को और बढ़ावा दे रही है। कंपनी को उम्मीद है कि अगले 3 सालों में भारत में 3% से 6% की सालाना ग्रोथ बनी रहेगी। यह मार्केट इतना बड़ा है कि 2031 तक इसके $50 बिलियन से ऊपर जाने का अनुमान है।

फाइनेंशियल रणनीति: कर्ज घटाना पहली प्राथमिकता

Pernod Ricard अपनी नेट डेट-टू-EBITDA रेश्यो को FY2029 तक 3x से नीचे लाने पर फोकस कर रही है। 2025 के अंत तक यह रेश्यो 3.7x पर था, और हालिया 3.2x पर है। इन फाइनेंशियल लक्ष्यों को हासिल करने के लिए, कंपनी ने अपने भारतीय सब्सिडियरी के IPO को फिलहाल रद्द करने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि कंपनी फिलहाल अपने भारतीय ऑपरेशंस से कैपिटल जुटाने की बजाय, अपने कंट्रोल में रखना चाहती है और इसके लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पोटेंशियल पर भरोसा कर रही है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग $25 बिलियन है, और इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (PE) रेश्यो अपने हिस्टॉरिकल रेंज के निचले स्तर, करीब 13.1x से 13.6x पर ट्रेड कर रहा है।

ग्लोबल चुनौतियां और कर्ज का जोखिम

भारत में जहां Pernod Ricard की परफॉरमेंस मजबूत है, वहीं कंपनी ग्लोबल लेवल पर मुश्किलों का सामना कर रही है। फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) के पहले हाफ में, कंपनी की ऑर्गेनिक नेट सेल्स में 5.9% की गिरावट आई, जो कुल €5.25 बिलियन रही। अमेरिका रीजन में सेल्स 12% और खासकर यूनाइटेड स्टेट्स में 15% गिरी है, जिसका कारण डिस्ट्रीब्यूटर इन्वेंटरी एडजस्टमेंट और कमजोर मांग है। चीन में भी चुनौतियां बनी हुई हैं। अमेरिकी डॉलर और भारतीय रुपये जैसी करेंसी में उतार-चढ़ाव ने भी रिपोर्टेड नंबर्स को प्रभावित किया है। कंपनी के 3.2x से 3.7x के मौजूदा डेट-टू-EBITDA रेश्यो को देखते हुए, FY2029 तक 3x से नीचे लाने के लिए अभी काफी कर्ज कम करना होगा। IPO न करने के फैसले का मतलब है कि कर्ज घटाने के लिए कंपनी को दूसरे, शायद धीमे, तरीके अपनाने होंगे।

भविष्य की राह और मार्केट आउटलुक

एनालिस्ट्स Pernod Ricard के भविष्य को लेकर काफी पॉजिटिव हैं, और इसकी रेटिंग 'OUTPERFORM' है, जिसका टारगेट प्राइस €86.84 है। कंपनी का अनुमान है कि FY26-29 के दौरान 3% से 6% की सेल्स ग्रोथ वापस रफ्तार पकड़ेगी। भारत में लगातार बढ़ता प्रीमियम सेगमेंट और डेमोग्राफिक सपोर्ट इस उम्मीद का एक बड़ा सहारा है। कॉम्पिटिटर्स जैसे Diageo (United Spirits) भी भारत के प्रीमियम सेगमेंट में भारी निवेश कर रहे हैं। ऐसे में, Pernod Ricard का भारत पर फोकस बनाए रखना उसकी स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा है। कंपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने और मार्जिन को स्थिर रखने पर काम कर रही है, साथ ही अपने प्रीमियम पोर्टफोलियो में निवेश जारी रखेगी।

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