प्रीमियम स्पिरिट्स बढ़ा रही ग्रोथ
Pernod Ricard India प्रीमियम स्पिरिट्स की ओर बढ़ते बड़े बाजार के ट्रेंड का फायदा उठा रही है। यह ट्रेंड ग्लोबल लेवल पर काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत के एल्कोहलिक बेवरेज मार्केट में अच्छी ग्रोथ का अनुमान है, जिसमें स्पिरिट्स रेवेन्यू में सबसे आगे हैं। बढ़ती आय, युवा डेमोग्राफिक और बदलते टेस्ट के कारण प्रीमियम कैटेगरीज, ओवरऑल मार्केट से तेज़ी से बढ़ रही हैं। इस माहौल ने Pernod Ricard India को लीडरशिप बनाए रखने में मदद की, जिसने FY25 में ₹27,446 करोड़ की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल से थोड़ी ज़्यादा है। कंपनी ने पिछले पांच सालों में 8% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल की है, जिससे यह Diageo India जैसी कंपनियों से आगे निकल गई है, जिसने FY25 में ₹27,276 करोड़ का रेवेन्यू बताया था।
पोर्टफोलियो को प्रीमियम बनाने के लिए विनिवेश (Divestment)
Pernod Ricard India के Imperial Blue बिजनेस को Tilaknagar Industries को लगभग ₹4,148 करोड़ में बेचने का फैसला एक स्ट्रैटेजिक पोर्टफोलियो रीअलाइनमेंट है। इस कदम से कंपनी अपने ज़्यादा मार्जिन वाले, प्रीमियम ब्रांड्स पर रिसोर्सेज (संसाधन) फोकस कर पाएगी। हाई-वॉल्यूम, लो-मार्जिन सेगमेंट से बाहर निकलकर, Pernod Ricard India का लक्ष्य प्रॉफिटेबिलिटी (लाभप्रदता) बढ़ाना और प्रीमियमाइजेशन का और ज़्यादा फायदा उठाना है। इस डील में 116 कर्मचारी और Seagram's नेमिंग लाइसेंस भी शामिल था, जिससे Tilaknagar Industries को व्हिस्की मार्केट में ग्रोथ में मदद मिलेगी। Pernod Ricard India के मुख्य ब्रांड्स में अब Royal Stag, Blenders Pride, 100 Pipers, Longitude 77, और 'Xclamat!on' शामिल हैं।
IPO की अटकलें शांत, पेरेंट कंपनी का कर्ज घटाने पर जोर
Pernod Ricard ने फिलहाल किसी भी संभावित लिस्टिंग (IPO) पर कोई फैसला न होने की बात कही है, बावजूद इसके कि मार्केट में अटकलें और Goldman Sachs और Cyril Amarchand Mangaldas जैसे सलाहकारों के साथ बातचीत की खबरें चल रही थीं। यह ग्लोबल पेरेंट, Pernod Ricard SA, की रणनीति के अनुरूप है, जिसके CFO ने कहा था कि भारतीय लिस्टिंग उनके डेट (कर्ज) को कम करने की रणनीति का हिस्सा नहीं है। पेरेंट कंपनी का लक्ष्य 2029 तक नेट डेट टू EBITDA रेशियो को 3.0x से नीचे लाना है, जबकि मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार यह रेशियो लगभग 3.7x है। S&P Global Ratings द्वारा ऑपरेटिंग प्रेशर के कारण नेगेटिव आउटलुक रिवीजन और यह लेवरेज, भारत में तुरंत इक्विटी डाइल्यूशन (शेयरों का बढ़ना) की बजाय कर्ज प्रबंधन को प्राथमिकता देने का संकेत देते हैं। पेरेंट कंपनी का लगभग 28x का P/E रेशियो सब्सिडियरी के लिस्ट होने पर हाई वैल्यूएशन की संभावना दिखाता है, लेकिन डेट रिडक्शन (कर्ज घटाना) मुख्य है।
भारत में मार्केट पर दबदबा, पर प्रतिस्पर्धा और जोखिम भी
भारत Pernod Ricard के लिए महत्वपूर्ण है, जो वॉल्यूम के हिसाब से सबसे बड़ा और वैल्यू के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा ग्लोबल मार्केट है, जो कुल नेट सेल्स का लगभग 13% है। भारतीय स्पिरिट्स मार्केट में 2034 तक 3-4% CAGR की ग्रोथ का अनुमान है, जिसमें प्रीमियम सेगमेंट्स वैल्यू बढ़ा रहे हैं। Pernod Ricard India को Diageo India (United Spirits) से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है; दोनों की भारतीय ऑपरेशंस का संयुक्त रेवेन्यू ₹55,000 करोड़ से अधिक है। पॉजिटिव आउटलुक के बावजूद, जोखिमों में राज्य-स्तरीय रेगुलेटरी बाधाएं, कड़ी प्रतिस्पर्धा और पेरेंट कंपनी को प्रभावित करने वाले ग्लोबल आर्थिक दबाव शामिल हैं। प्रीमियमाइजेशन पर फोकस मार्केट ट्रेंड्स के अनुरूप है, लेकिन कर्ज घटाने की गति और भविष्य की लिस्टिंग के फैसले मुख्य बने हुए हैं।
