Pernod Ricard India के 'Chivas Luxe Collective' परफ्यूम को लेकर एक व्हिसलब्लोअर ने शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि इस परफ्यूम के बहाने Diljit Dosanjh के कॉन्सर्ट में शराब का सरोगेट विज्ञापन (surrogate advertising) किया जा रहा है, जो कंपनी के आगामी IPO और दिल्ली में लाइसेंस विवादों के बीच एक नया रेगुलेटरी रिस्क बन सकता है।
सरोगेट विज्ञापन का विवाद
Pernod Ricard India की मार्केटिंग रणनीति पर सवाल उठे हैं। एक अज्ञात व्हिसलब्लोअर ने शिकायत की है कि कंपनी अपने 'Chivas Luxe Collective' परफ्यूम ब्रांड का इस्तेमाल करके अपनी मुख्य शराब 'Chivas Regal' का परोक्ष रूप से प्रमोशन कर रही है। यह विवाद 30 अक्टूबर से शुरू होने वाले मशहूर सिंगर Diljit Dosanjh के कॉन्सर्ट टूर को लेकर है।
नियमों की घेराबंदी
भारत में 'सरोगेट विज्ञापन' पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। Central Consumer Protection Authority (CCPA) के नियमों के मुताबिक, कोई भी कंपनी परफ्यूम, म्यूजिक सीडी या पानी जैसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल शराब को प्रमोट करने के लिए नहीं कर सकती। Advertising Standards Council of India (ASCI) का स्पष्ट कहना है कि ऐसी ब्रांड एक्सटेंशन का वास्तविक रिटेल बाजार में मौजूद होना अनिवार्य है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि यह परफ्यूम लाइन असल में सिर्फ कॉर्पोरेट गिफ्टिंग तक सीमित है और आम ग्राहकों के लिए बाजार में इसकी उपलब्धता न के बराबर है।
कंपनी के लिए नाजुक वक्त
यह विवाद कंपनी के लिए ऐसे समय में आया है जब वह अपने संभावित IPO की तैयारी कर रही है। Pernod Ricard पहले से ही दिल्ली में रेगुलेटरी दिक्कतों से जूझ रही है, जहां दिल्ली एक्साइज डिपार्टमेंट ने कंपनी का L-1 होलसेल लिकर लाइसेंस खारिज कर दिया था।
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस मामले का असर भविष्य में अन्य लिकर कंपनियों की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी पर भी पड़ सकता है। Diageo और Heineken जैसी बड़ी कंपनियां भी इवेंट्स के जरिए ब्रांड रिकॉल बनाए रखती हैं, लेकिन अब रेगुलेटर्स इन पर कड़ी नजर रख रहे हैं। निवेशकों की नजरें अब आगामी कॉन्सर्ट और अथॉरिटीज की ओर से होने वाली किसी भी सख्त कार्रवाई पर टिकी हैं।
