Perfetti Van Melle India ने अगले चार वर्षों में ₹8,000 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। कंपनी अब अपनी पुरानी रणनीति से हटकर सस्ती टॉफियों के बजाय महंगे प्रोडक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
प्रीमियम सेगमेंट पर कंपनी का दांव
मिठाई और कन्फेक्शनरी बाजार की बड़ी खिलाड़ी Perfetti Van Melle इंडिया अब अपनी बिजनेस स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव करने जा रही है। कंपनी का लक्ष्य अगले 4 साल में अपने रेवेन्यू को दोगुना करके ₹8,000 करोड़ तक पहुंचाना है। अब तक कंपनी की ग्रोथ मुख्य रूप से ₹1 वाली टॉफियों पर टिकी थी, लेकिन अब कंपनी ₹5 और ₹10 वाले प्रोडक्ट्स पर ज्यादा फोकस कर रही है। यह कदम वैल्यू-ड्रिवेन ग्रोथ हासिल करने की दिशा में एक बड़ी कवायद है।
FMCG सेक्टर में 'प्रीमियम' का दौर
यह बदलाव पूरे भारतीय FMCG सेक्टर के लिए एक बड़ा संकेत है। बढ़ती महंगाई और ऑपरेशनल कॉस्ट के दबाव के बीच, कंपनियां अब 'प्रीमियमाइजेशन' का सहारा ले रही हैं। इसका सीधा मतलब है कि कंपनियां कम मात्रा बेचने के बावजूद बेहतर मार्जिन कमाने की कोशिश में हैं। इससे रॉ मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी मुनाफे पर कम पड़ता है।
डिजिटल और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क
कंपनी अपने डिजिटल फुटप्रिंट को भी मजबूत कर रही है। फिलहाल ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स से कंपनी की आय का सिर्फ 2.5% से 3% हिस्सा ही आता है। चूंकि सस्ती टॉफियां ऑनलाइन डिलीवर करना किफायती नहीं होता, इसलिए कंपनी अब बड़े और कस्टमाइज्ड पैक्स लॉन्च कर रही है, जो घर के इस्तेमाल के लिए बेहतर हैं। यह बदलाव कंपनी के 55 लाख रिटेल आउटलेट्स के नेटवर्क के साथ मिलकर कंपनी की पहुंच को और व्यापक बनाएगा।
क्या हैं चुनौतियां?
भारतीय बाजार अपनी कीमत के प्रति बेहद संवेदनशील (price-sensitive) है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में ₹1 वाली टॉफियों की भारी डिमांड है। ऐसे में, यदि कंपनी ने तेजी से दाम बढ़ाए, तो स्थानीय प्रतियोगियों से मार्केट शेयर खोने का रिस्क बना हुआ है। हालांकि, मैनेजमेंट ने संकेत दिए हैं कि वे सीधा जंप करने के बजाय ₹2 जैसे इंटरमीडिएट प्राइस पॉइंट्स का रास्ता अपनाएंगे ताकि ग्राहकों को झटका न लगे।
