PepsiCo India ने अपने 'pep+' सस्टेनेबिलिटी प्लान को रफ्तार दी है। कंपनी अब इलेक्ट्रिक लॉजिस्टिक्स, रीजेनरेटिव फार्मिंग और लो-शुगर प्रोडक्ट्स के जरिए अपने ऑपरेशंस को पूरी तरह मॉडर्न बना रही है।
खेती से लेकर लॉजिस्टिक्स तक बदलाव
PepsiCo India अपने सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए 36,000 किसानों के साथ मिलकर काम कर रही है। डिजिटल टूल्स के जरिए मिट्टी की सेहत की निगरानी की जा रही है, ताकि चिप्स के लिए जरूरी आलू की 100% लोकल सोर्सिंग सुनिश्चित की जा सके। यह रणनीति इनपुट कॉस्ट को स्थिर रखने में मदद कर रही है।
ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
कंपनी ने अपने कार्बन फुटप्रिंट को घटाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं:
- कोसी और पटौदी के बीच 13 बड़े इलेक्ट्रिक ट्रकों का कॉरिडोर शुरू किया है।
- लास्ट-माइल डिलीवरी के लिए 800 से ज्यादा गाड़ियों को रेट्रोफिट किया गया है।
- पुणे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में पानी की खपत में 90% की कटौती हुई है और कुल फ्यूल मिक्स में 97% हिस्सेदारी बायोमास की है।
बदलता पोर्टफोलियो
बदलती उपभोक्ता पसंद को देखते हुए, कंपनी ने अपने ड्रिंक्स पोर्टफोलियो का 50% से ज्यादा हिस्सा लो-शुगर या जीरो-शुगर में बदल दिया है। इसके अलावा, कुरकुरे ज्वार पफ्स जैसे मिलेट्स आधारित स्नैक्स पर भी कंपनी का फोकस बढ़ रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
हालांकि PepsiCo India एक प्राइवेट एंटिटी है, लेकिन इसकी यह रणनीति पूरे FMCG सेक्टर के लिए एक बेंचमार्क है। Varun Beverages जैसे लिस्टेड पार्टनर्स के लिए यह समझना जरूरी है कि ये निवेश कैसे लंबे समय में मार्जिन्स को प्रभावित करेंगे। हालांकि, इन तकनीकों के लिए भारी कैपिटल स्पेंडिंग की जरूरत है, इसलिए असली चुनौती यह होगी कि क्या ये 'ग्रीन इन्वेस्टमेंट' बढ़ती लागत को ऑफसेट कर पाएंगे।
