बेंगलुरु की पेरेंटिंग प्लेटफॉर्म Peeko ने Chiratae Ventures के नेतृत्व में सीरीज A फंडिंग जुटाई है। कंपनी इस पैसे का इस्तेमाल अपने डिलीवरी नेटवर्क और टेक्नोलॉजी को बढ़ाने में करेगी। एक प्राइवेट कंपनी के तौर पर Peeko अब कॉम्पिटिटिव मार्केट में अपनी जगह बना रही है, जहां स्पेशलाइज्ड बेबीकेयर रिटेलर्स और बड़े क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स दोनों से मुकाबला है।
Peeko जुटा रही बड़ी फंडिंग
बेंगलुरु की बेबीकेयर सेगमेंट पर फोकस करने वाली स्टार्टअप Peeko ने Chiratae Ventures के नेतृत्व में सीरीज A फंडिंग हासिल कर ली है। इस राउंड में मौजूदा निवेशक Stellaris Venture Partners ने भी हिस्सा लिया। कंपनी इस फंड का इस्तेमाल अपनी टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने, नए टैलेंट को हायर करने और अपने ऑपरेशनल फुटप्रिंट का विस्तार करने के लिए करेगी।
अनोखा 'ट्राई-एंड-बाय' मॉडल
IIT एलुमनाई Chetan Sharma, Vivek Khetan और Abhijit Gairola द्वारा स्थापित, Peeko पेरेंटिंग एसेंशियल्स के लिए एक क्विक-कॉमर्स मॉडल पर काम करती है। यह प्लेटफॉर्म 60 मिनट से कम समय में डिलीवरी और एक अनोखे 'ट्राई-एंड-बाय' फीचर की पेशकश करके खुद को अलग करती है। इससे ग्राहकों को खरीदारी पूरी करने से पहले प्रोडक्ट के फिट होने की जांच करने की सुविधा मिलती है। इस तरीके का मकसद एक ऐसे सेगमेंट में भरोसा बनाना है जहां पेरेंट्स के लिए प्रोडक्ट की क्वालिटी और उपयुक्तता सर्वोपरि होती है।
विस्तार और चुनौतियाँ
कंपनी वर्तमान में बेंगलुरु में काम कर रही है और कपड़ों, खिलौनों से लेकर रोजमर्रा के उपभोग्य वस्तुओं तक, स्टॉक-कीपिंग यूनिट्स (SKUs) का एक बड़ा इन्वेंट्री रखती है। इस नई पूंजी के साथ, मैनेजमेंट का लक्ष्य डार्क स्टोर्स (छोटे, पड़ोस-केंद्रित वितरण केंद्र) की संख्या बढ़ाना है ताकि पूरे शहर में कवरेज हासिल किया जा सके। विस्तार की यह रणनीति भारत में तेजी से बढ़ते बेबी और किड्स कॉमर्स मार्केट में एक बड़ा हिस्सा हासिल करने पर केंद्रित है।
हालांकि, क्विक-कॉमर्स स्पेस में काम करने में महत्वपूर्ण चुनौतियाँ शामिल हैं। यह सेक्टर अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और कैपिटल-इंटेंसिव है, जिसके लिए तेज डिलीवरी स्पीड और व्यापक उत्पाद उपलब्धता बनाए रखने के लिए लगातार निवेश की आवश्यकता होती है। Peeko को न केवल FirstCry जैसे स्पेशलाइज्ड बेबीकेयर रिटेलर्स से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, बल्कि उन बड़े, स्थापित क्विक-कॉमर्स प्लेयर्स से भी मुकाबला करना पड़ता है जो तेजी से बेबी एसेंशियल्स को शामिल करने के लिए अपनी उत्पाद श्रेणियों का विस्तार कर रहे हैं।
आगे की राह
चूंकि Peeko एक प्राइवेट कंपनी है, यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड नहीं है, जिसका मतलब है कि कोई पब्लिक स्टॉक प्राइस ट्रैक करने के लिए उपलब्ध नहीं है। इच्छुक पार्टियां संभवतः इस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगी कि कंपनी ऑपरेशंस को स्केल करते हुए अपनी कैश बर्न को कैसे मैनेज करती है। बिजनेस के लिए मुख्य परीक्षा यह होगी कि वह ऐसे बाजार में यूनिट इकोनॉमिक्स और कस्टमर रिटेंशन में सुधार करने में कितनी सक्षम है, जहां सुविधा एक बड़ा युद्ध का मैदान है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी की नई शहरी बाजारों में प्रवेश करते हुए अपनी सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने की क्षमता प्राथमिक मीट्रिक होगी।
