क्यों हुआ मुनाफे में इतना बड़ा फॉल?
भले ही Patanjali Foods ने अपनी बिक्री में 16.5% की शानदार ग्रोथ दर्ज की और रेवेन्यू ₹10,483 करोड़ पार कर गया, लेकिन मुनाफे पर भारी दबाव देखा गया। कंपनी का नेट प्रॉफिट 26% की गिरावट के साथ ₹364.2 करोड़ पर आ गया। इसकी सबसे बड़ी वजह EBITDA मार्जिन का 6.2% से गिरकर 4.1% पर आ जाना है। यह दर्शाता है कि कंपनी को अपनी बिक्री बढ़ाने के बावजूद लागतें कंट्रोल करने में मुश्किल आ रही है, जिससे हर रुपये की कमाई पर उसका मुनाफा कम हो गया। इस खबर के बाद कंपनी के शेयर में 0.40% की मामूली गिरावट आई और यह ₹520.30 पर बंद हुआ।
FMCG और एडिबल ऑयल सेगमेंट का हाल
कंपनी के दोनों प्रमुख सेगमेंट, FMCG और एडिबल ऑयल, ने बिक्री बढ़ाने में योगदान दिया। FMCG सेगमेंट ने 38.93% की ग्रोथ के साथ ₹3,248.35 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, और इसका EBITDA मार्जिन 10.88% रहा। बिस्किट्स का बिज़नेस 26.44% और घी 46.50% बढ़ा। वहीं, एडिबल ऑयल सेगमेंट ने 8.98% की ग्रोथ के साथ ₹7,335.71 करोड़ का रेवेन्यू दिया, लेकिन इसका EBITDA मार्जिन काफी कम 2.39% रहा। चीनी और पाम ऑयल जैसी इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी ने मार्जिन पर दबाव बनाए रखा।
इंडस्ट्री में कैसी है Patanjali Foods की पोजिशन?
FMCG सेक्टर में Hindustan Unilever और Marico जैसी बड़ी कंपनियां काफी बेहतर EBITDA मार्जिन पर काम करती हैं। फरवरी 2026 तक HUL का P/E रेशियो लगभग 52.75 और Marico का 52.8 के आसपास था, जबकि Patanjali Foods का P/E रेशियो करीब 46.5 है। भारतीय FMCG सेक्टर में 2026 के लिए अच्छी वॉल्यूम ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन Patanjali Foods का मार्जिन प्रदर्शन फिलहाल थोड़ा पीछे है। वहीं, एडिबल ऑयल सेक्टर में इंपोर्ट पर निर्भरता और भू-राजनीतिक वजहों से कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं।
ब्रोकरेज की राय और शेयर का प्रदर्शन
Patanjali Foods के शेयर में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव देखा गया है। फरवरी 2026 की शुरुआत में, कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने 'BUY' रेटिंग के साथ ₹700 का टारगेट प्राइस दिया था, जबकि अन्य ने 'Reduce' रेटिंग और ₹500-₹590 का टारगेट दिया। MarketsMOJO ने फरवरी 2026 की शुरुआत में ही स्टॉक को 'Sell' रेटिंग दे दी थी। पिछले एक साल में शेयर की कीमत में 17.78% की गिरावट देखी गई है।
Bear Case: मार्जिन दबाव और लागतें
बिक्री बढ़ने के बावजूद, Patanjali Foods के घटते प्रॉफिट मार्जिन भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 23.9% (दिसंबर 2025 तक) मैनेजेबल है, लेकिन ऑपरेटिंग कैश फ्लो निगेटिव रहा है। HUL जैसे दिग्गजों (जिनका डेट-टू-इक्विटी रेशियो 0.04 है) की तुलना में Patanjali Foods को लागतें ग्राहकों पर पास करने में चुनौती आ रही है। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 11-12% और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) 15-16% के आसपास है, जो कुछ प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम है।
आगे क्या उम्मीद है?
कंपनी का मैनेजमेंट आने वाले समय के लिए पॉजिटिव है। उन्हें उम्मीद है कि मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर, कम होती महंगाई और बेहतर रूरल डिमांड के चलते बिक्री में अच्छी ग्रोथ जारी रहेगी। मैनेजमेंट का अनुमान है कि ग्लोबल सप्लाई की दिक्कतों के कारण एडिबल ऑयल की कीमतें 5-8% तक बढ़ सकती हैं। एनालिस्ट्स ने अगले कुछ सालों में रेवेन्यू ग्रोथ और EPS में बढ़त का अनुमान लगाया है, और टारगेट प्राइस ₹500 से ₹700 के बीच दिए गए हैं।