महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने Parsi Dairy Farm Pvt Ltd का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। कंपनी के प्रिंसेस स्ट्रीट यूनिट में गंभीर हाइजीन और फूड सेफ्टी के नियमों का उल्लंघन पाया गया है। इस कार्रवाई के बाद, कंपनी तब तक किसी भी खाद्य उत्पाद का निर्माण या बिक्री नहीं कर पाएगी जब तक कि वह सभी मानकों को पूरा नहीं करती। यह कदम राज्य भर में चल रहे एक बड़े अभियान का हिस्सा है, जिसमें **₹1.9 करोड़** से अधिक के डेयरी और खाद्य उत्पादों को जब्त किया गया है।
प्रिंसेस स्ट्रीट यूनिट में क्या मिला?
FDA की जांच में डेयरी के प्रोडक्शन साइट पर कई गंभीर खामियां पाई गईं। अधिकारियों ने मक्खियों का प्रकोप और उचित एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सुविधाओं की कमी देखी। इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें तो कच्चा दूध प्राप्त करने वाले डॉक क्षतिग्रस्त थे, फर्श खराब हो रहा था, और ड्रेनेज सिस्टम अपर्याप्त था।
ऑपरेशनल स्तर पर भी कई दिक्कतें सामने आईं, जैसे कि कई उत्पादों पर 'बेस्ट बिफोर' या एक्सपायरी डेट की लेबलिंग न होना, फूड हैंडलिंग स्टाफ के मेडिकल रिकॉर्ड का अधूरा होना, और डिलीवरी वाहनों के लिए अपर्याप्त सैनिटेशन प्रोटोकॉल। FDA ने कहा कि इन हालातों से माइक्रोबियल कंटैमिनेशन का सीधा खतरा था, जो उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।
पूरे राज्य में हुई कार्रवाई का असर
Parsi Dairy Farm का लाइसेंस निलंबन 14 और 15 जुलाई को FDA द्वारा महाराष्ट्र में चलाए गए दो दिवसीय विशेष अभियान के दौरान हुआ। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य डेयरी, भोजनालयों और निर्माण इकाइयों में खाद्य गुणवत्ता मानकों को लेकर बढ़ रही चिंताओं को दूर करना था। इस दौरान, FDA ने पूरे राज्य में ₹1.9 करोड़ से अधिक के सामान जब्त किए। इसमें 2,317 लीटर दूध और लगभग 6,850 किलोग्राम विभिन्न डेयरी उत्पाद शामिल हैं, जिनकी कीमत करीब ₹45.78 लाख है।
नियामक कार्रवाई का व्यापक दायरा
यह कार्रवाई सिर्फ Parsi Dairy Farm तक सीमित नहीं रही, बल्कि राज्य भर की कई अन्य जगहों पर भी हुई। मुंबई और अन्य जिलों में, अधिकारियों ने प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला बेचने वाले विक्रेताओं को निशाना बनाया। अन्य विशिष्ट कार्रवाइयों में मुलुंड में 61 किलोग्राम डेयरी उत्पादों को जब्त करना शामिल था, क्योंकि उनमें पनीर एनालॉग्स के इस्तेमाल और लेबलिंग संबंधी समस्याएं थीं। इसके अलावा, वसई में शिव डेयरी जैसी छोटी इकाइयों का संचालन भी बंद कर दिया गया क्योंकि उनके पास अनिवार्य पंजीकरण नहीं था।
Parsi Dairy Farm के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कंपनी और उसके ग्राहकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि वे इन हाइजीन खामियों को कब तक ठीक करते हैं और संचालन फिर से शुरू करने के लिए नियामक मंजूरी कैसे प्राप्त करते हैं।
