Parle Products लगातार 14वें साल भारत का सबसे ज़्यादा पसंद किया जाने वाला इन-होम (घर के अंदर इस्तेमाल होने वाला) FMCG ब्रांड बना हुआ है, वहीं Britannia Industries आउट-ऑफ-होम (घर के बाहर इस्तेमाल होने वाले) कैटेगरी में टॉप पर है। देश भर में FMCG ब्रांड्स की कुल पसंद में **5.1%** की बढ़ोतरी हुई है, हालांकि जानकारों का मानना है कि छोटे ब्रांड्स को बड़े और स्थापित नामों से कड़ी टक्कर मिल रही है।
Parle और Britannia का दबदबा जारी
'वर्ल्डपैन बाई न्यूमरेटर' की नई 'ब्रांड फुटप्रिंट इंडिया 2026' रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंज्यूमर्स की पसंद में Parle Products और Britannia Industries सबसे आगे हैं। Parle ने लगातार 14वें साल घर में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स के लिए अपना पहला स्थान बरकरार रखा है, जबकि Britannia ने घर के बाहर इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स में बाजी मारी है। यह रैंकिंग कंज्यूमर रीच पॉइंट्स (CRPs) के आधार पर तय की जाती है, जो यह मापती है कि कितने घर एक ब्रांड को कितनी बार खरीदते हैं।
FMCG सेक्टर में बढ़ा विश्वास
रिपोर्ट से पता चला है कि 2025 में पूरे भारत में FMCG ब्रांड्स के लिए कंज्यूमर की पसंद 5.1% बढ़कर कुल 129 बिलियन पॉइंट्स तक पहुंच गई। यह ग्रोथ सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, डेटा यह भी बताता है कि बड़े और छोटे कंपनियों के बीच की खाई बढ़ रही है। जिन ब्रांड्स की मार्केट में पहले से अच्छी पकड़ है, उन्होंने छोटे ब्रांड्स की तुलना में कहीं ज़्यादा बेहतर ग्रोथ दिखाई है। इससे यह साबित होता है कि बड़े और स्थापित ब्रांड्स अपने कस्टमर्स को बनाए रखने में ज़्यादा सफल हो रहे हैं, जबकि छोटे ब्रांड्स के लिए अपनी पहचान बनाना और बार-बार बिक्री हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है।
निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें
FMCG सेक्टर पर नज़र रखने वाले निवेशकों के लिए Britannia Industries एक महत्वपूर्ण कंपनी है। 13 अगस्त 2026 तक Britannia के शेयर लगभग ₹5,645 के भाव पर ट्रेड कर रहे थे। कंपनी की मार्केट में मजबूत पकड़ तो है, लेकिन यह एक मुश्किल कॉस्ट एनवायरनमेंट में काम कर रही है। हालिया अपडेट्स में, Britannia ने बताया है कि फ्यूल और पैकेजिंग मटेरियल जैसे लैमिनेट्स की कीमतों में उतार-चढ़ाव उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना रहा है। इसके अलावा, निवेशक अक्सर कंपनी के वैल्यूएशन पर भी ध्यान देते हैं, क्योंकि इसके शेयर की मौजूदा कमाई के मुकाबले कीमत अक्सर काफी ज़्यादा रहती है।
आगे की राह
सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कंपनियां बढ़ती महंगाई को कैसे संभालती हैं और साथ ही अपना मार्केट शेयर कैसे बचाती हैं। डेटा से पता चलता है कि कंज्यूमर्स भरोसेमंद और बड़े ब्रांड्स की ओर झुक रहे हैं, जिसका फायदा निकट भविष्य में बड़ी कंपनियों को मिल सकता है। हालांकि, भविष्य की ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां बढ़ती रॉ मटेरियल की लागत को डिमांड पर असर डाले बिना कैसे मैनेज कर पाती हैं। निवेशकों को इन कंपनियों से वॉल्यूम ग्रोथ, मार्जिन की स्थिरता और ग्लोबल सप्लाई चेन की अनिश्चितताओं से निपटने की उनकी क्षमता पर आने वाले अपडेट्स पर नज़र रखनी चाहिए।
