📈 रेवेन्यू में दमदार छलांग, 'नए ज़माने' के प्रोडक्ट्स ने दिखाया दम
Parag Milk Foods (PMFL) के नतीजे बताते हैं कि कंपनी ने Q3 FY26 में ₹1,000 करोड़ से ज़्यादा का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि से 14% अधिक है। कंपनी का 9 महीनों (9M FY26) का कुल रेवेन्यू भी 14% बढ़कर ₹2,872 करोड़ रहा। इस ग्रोथ में पारंपरिक डेयरी उत्पादों जैसे घी, पनीर और चीज़ का भी योगदान रहा, जिनके वॉल्यूम में 12% की बढ़ोतरी हुई। पर असली स्टार रहा 'न्यू एज' बिज़नेस, जिसमें Pride of Cows और Avvatar जैसे ब्रांड्स शामिल हैं। इस सेगमेंट ने 123% की रॉकेट जैसी ग्रोथ दिखाते हुए पहली बार तिमाही में ₹100 करोड़ से ज़्यादा का रेवेन्यू कमाया और अब कंपनी की कुल बिक्री का 9% हिस्सा रखता है।
📉 दूध की महंगाई का मार: मार्जिन पर दबाव, मुनाफा घटा
सबकुछ अच्छा होने के बावजूद, 20% तक बढ़ी दूध की कीमतों ने कंपनी के मुनाफे (Margins) पर भारी दबाव डाला है। Q3 FY26 में ग्रॉस मार्जिन (Gross Margin) पिछले साल के 27.2% से गिरकर 25.9% रह गया। इसी तरह, EBITDA मार्जिन भी 9% से घटकर 7.6% पर आ गया। मैनेजमेंट ने कीमतों में मामूली बढ़ोतरी और प्रोडक्ट मिक्स को बेहतर बनाकर सीक्वेंसियल ग्रॉस मार्जिन को 25.9% पर बनाए रखा, लेकिन YoY गिरावट साफ दिख रही है।
📊 नतीजों के मुख्य बिंदु:
- कुल रेवेन्यू: Q3 FY26 में ₹1,000 करोड़ से ज़्यादा (14% YoY ग्रोथ)। 9M FY26 में ₹2,872 करोड़ (14% YoY ग्रोथ)।
- ग्रॉस मार्जिन: Q3 FY26 में 25.9%, Q3 FY25 में 27.2% था।
- EBITDA मार्जिन: Q3 FY26 में 7.6%, Q3 FY25 में 9% था।
- नेट प्रॉफिट (PAT) खास आय को छोड़कर: Q3 FY26 में ₹35 करोड़ (2% YoY गिरावट)।
- खास आय (Exceptional Item): नए लेबर कोड के कारण कर्मचारी लाभ प्रावधान में बढ़ोतरी के चलते ₹5.7 करोड़ का प्रावधान।
- कर्ज़ में कमी: मार्च 2025 के ₹615 करोड़ से घटकर सितंबर 2025 तक ₹483 करोड़ हुआ।
- वर्किंग कैपिटल: लगभग 60-62 दिन तक सीमित।
🚀 कंपनी की आगे की राह और स्ट्रेटेजी
दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का रुझान फिलहाल जारी रहने की उम्मीद है। इससे निपटने के लिए, Parag Milk Foods अनुशासित मूल्य निर्धारण (Disciplined Pricing), अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने, ऑपरेशन्स को और कुशल बनाने और अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को समझदारी से विस्तार देने की रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी का विज़न PMFL को एक लीडिंग हेल्थ और न्यूट्रिशन ब्रांड के तौर पर स्थापित करना है, जिसमें 'न्यू एज' बिज़नेस अगले 2-3 साल में कंपनी की कुल आय का 20% हिस्सा देगा। निवेशकों की नज़र अब इस बात पर होगी कि कंपनी लागत में बढ़ोतरी को अपने ग्राहकों पर कितना प्रभावी ढंग से डाल पाती है और साथ ही वॉल्यूम ग्रोथ को कैसे बनाए रखती है।