Paint कंपनियों का रेवेन्यू तो **10-15%** बढ़ा है, लेकिन असली खेल डिमांड का है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के चलते मुनाफे पर कैंची चलने का खतरा बना हुआ है, जबकि वॉल्यूम ग्रोथ महज **5-7%** पर अटकी है।
डिमांड की असली तस्वीर
पेंट इंडस्ट्री में रेवेन्यू ग्रोथ और असल डिमांड के बीच एक बड़ा अंतर दिख रहा है। सितंबर तिमाही में कंपनियों ने 10-15% रेवेन्यू ग्रोथ तो दिखाई है, लेकिन यह डिमांड बढ़ने की वजह से नहीं, बल्कि अप्रैल से लागू की गई कीमतों में बढ़ोतरी का नतीजा है। असल डिमांड का पैमाना, यानी वॉल्यूम ग्रोथ, अभी भी 5-7% के दायरे में ही सिमटा हुआ है।
मार्जिन पर कच्चे तेल की मार
पेंट बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (Raw Materials) के लिए कंपनी पूरी तरह से क्रूड ऑयल पर निर्भर है। ग्लोबल मार्केट में एनर्जी प्राइसेस बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट काफी बढ़ गई है। कंपनियां लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने की कोशिश तो कर रही हैं, लेकिन कॉम्पिटिशन के चलते यह पूरी तरह मुमकिन नहीं हो पा रहा है। इसी कारण एनालिस्ट्स का मानना है कि सेक्टर का मार्जिन 70-120 बेसिस पॉइंट्स तक गिर सकता है।
कड़ी प्रतिस्पर्धा और कंपनियों की रणनीति
मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बचाने के लिए Asian Paints, Berger Paints और Kansai Nerolac जैसी बड़ी कंपनियां एग्रेसिव प्रमोशन और रिबेट (Rebate) का सहारा ले रही हैं।
- Asian Paints: मार्केट लीडर होने के नाते कंपनी ने कीमतें काफी बढ़ाई हैं, जिससे मार्जिन में 100 बेसिस पॉइंट्स से ज्यादा की गिरावट का खतरा है।
- Kansai Nerolac: यहाँ मार्जिन पर 50 बेसिस पॉइंट्स का असर दिखने का अनुमान है।
- Berger Paints: निचले बेस इफेक्ट के चलते यहाँ स्थिति थोड़ी स्थिर रहने की उम्मीद है।
आने वाले समय में फेस्टिव सीजन की डिमांड और क्रूड ऑयल के भाव ही यह तय करेंगे कि पेंट कंपनियां अपने मुनाफे को बचा पाती हैं या नहीं।
