Page Industries: रेवेन्यू बढ़ा, पर लागत के बोझ से मुनाफा घटा | Jockey India

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AuthorAditya Rao|Published at:
Page Industries: रेवेन्यू बढ़ा, पर लागत के बोझ से मुनाफा घटा | Jockey India
Overview

Page Industries का रेवेन्यू (Revenue) चौथी तिमाही में **14.1%** बढ़कर **₹1,252 करोड़** हो गया। हालांकि, कॉटन की बढ़ती कीमतों और खर्चों में इजाफे के कारण नेट प्रॉफिट (Net Profit) में सिर्फ **9%** की बढ़ोतरी हुई, जिससे प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर दबाव बढ़ा।

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Page Industries: कमाई बढ़ी, पर मार्जिन पर दबाव

Page Industries, जो भारत में Jockey ब्रांड के लिए जानी जाती है, ने वित्तीय वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में 14.1% की मजबूत बढ़ोतरी के साथ ₹1,252 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है। कंपनी ने 5.45 करोड़ पीस बेचकर सेल्स वॉल्यूम में 10.8% की बढ़ोतरी हासिल की।

लेकिन, नेट प्रॉफिट में सिर्फ 9% का इजाफा हुआ और यह ₹178 करोड़ रहा। ऑपरेटिंग खर्चों में बढ़ोतरी के चलते कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन में 0.6% की गिरावट आई। EBITDA 10.7% बढ़कर ₹260 करोड़ रहा, लेकिन इसका मार्जिन भी संकुचित हुआ।

कंपनी मैनेजमेंट का कहना है कि कॉटन की कीमतों में लगातार तेजी और अन्य कच्चे माल की लागत बढ़ना खर्चों में बढ़ोतरी के मुख्य कारण हैं। Page Industries अपने डिस्ट्रीब्यूशन, मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी में भी भारी निवेश कर रही है, जिससे लागत बढ़ रही है, भले ही लंबी अवधि में इसके फायदे हों।

इंडस्ट्री की चुनौतियां और मार्जिन पर असर

भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर लागत महंगाई का सामना कर रहा है। कॉटन यार्न की कीमतों में 20% का उछाल आया है, और डाई, केमिकल व पॉलीमर की लागत भी बढ़ी है। ईरान युद्ध जैसी घटनाओं से सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने लॉजिस्टिक्स लागत को भी बढ़ाया है।

Page Industries का मुकाबला Van Heusen और Hanes जैसे ब्रांड्स से है, वहीं यह Lux और Dollar Industries जैसे प्लेयर्स के साथ इकोनॉमी सेगमेंट में भी प्रतिस्पर्धा करती है। प्रतिस्पर्धियों की तुलना में ऐतिहासिक रूप से मजबूत सेल्स ग्रोथ के बावजूद, मौजूदा बाजार माहौल में मार्जिन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। मार्च 2026 में व्यापक टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 3.6% की गिरावट आई थी।

एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय और हाई वैल्यूएशन

एनालिस्ट्स Page Industries पर बंटे हुए हैं। 12 एनालिस्ट्स इसे खरीदने की सलाह दे रहे हैं, 7 बेचने की और 7 होल्ड करने की। 12 महीने का औसत प्राइस टारगेट लगभग ₹37,936 है, जो मौजूदा स्तरों से थोड़ी गिरावट का संकेत देता है।

21 मई 2026 तक, कंपनी का P/E रेश्यो लगभग 57.23 है, जो इंडस्ट्री के औसत 44.62 से काफी ज्यादा है। यह हाई वैल्यूएशन भविष्य की ग्रोथ के लिए निवेशक की उम्मीदों को दर्शाता है, लेकिन मौजूदा मार्जिन दबाव इन उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है।

निवेशकों की चिंताएं और स्टॉक परफॉर्मेंस

निवेशकों का ध्यान लगातार मार्जिन घटने पर है। कॉटन की बढ़ती लागत सीधे मुनाफे को प्रभावित करती है, जो पूरे टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए एक चुनौती है। Page Industries के स्टॉक ने पिछले एक साल में Nifty 50 इंडेक्स को अंडरपरफॉर्म किया है, जो इंडेक्स के 3.3% के मुकाबले 19% गिरा है। यह दर्शाता है कि बाजार की चिंताएं पहले से ही इसके वैल्यूएशन को प्रभावित कर रही हैं।

डिविडेंड और भविष्य की रणनीति

लागत दबाव के बावजूद, Page Industries ने FY26 के लिए ₹150 प्रति इक्विटी शेयर का चौथा अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है। यह कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ और शेयरधारकों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कंपनी सप्लाई चेन में सुधार और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के माध्यम से मार्जिन की चुनौतियों से निपटने की योजना बना रही है।

पूरे वित्तीय वर्ष FY26 के लिए, रेवेन्यू ₹5,246.8 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹763.8 करोड़ रहा। आगे कंपनी की रणनीति लागत प्रबंधन के साथ-साथ ग्रोथ पहलों को समर्थन देने पर केंद्रित होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.