प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अब टोबैको सेक्टर में विदेशी निवेश (FDI) के सभी रास्तों को बंद करने की संभावना पर विचार कर रहा है। सरकार टेक्नोलॉजी और ब्रांड लाइसेंसिंग से जुड़ी लूपहोल्स को खत्म करने की तैयारी में है, जिससे पूरी इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है।
भारत सरकार का प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) टोबैको सेक्टर में विदेशी निवेश को लेकर एक सख्त रुख अपनाते हुए इसकी समीक्षा कर रहा है। वर्तमान नियमों के तहत सिगरेट और सिगार के निर्माण में FDI पर मनाही है, लेकिन ब्रांड लाइसेंसिंग, टेक्नोलॉजी कोलैबोरेशन और मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए विदेशी कंपनियां भारतीय बाजार में मौजूदगी बनाए हुए हैं। अब सरकार इन सभी रास्तों को पूरी तरह बंद करने के प्रस्ताव पर गौर कर रही है।
कंपनियों पर क्या होगा असर?
इस फैसले से ITC, Godfrey Phillips और VST Industries जैसी कंपनियों के बिजनेस मॉडल प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि ये कंपनियां मुख्य रूप से घरेलू हैं, लेकिन अगर विदेशी पार्टनरशिप पर कोई नई पाबंदी आती है, तो इन्हें अपने ऑपरेशंस को पूरी तरह से रीस्ट्रक्चर करना पड़ सकता है। निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं कि क्या सरकार पुरानी फ्लैक्सिबिलिटी को बनाए रखेगी या विदेशी पूंजी को पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखाएगी।
स्वास्थ्य बनाम किसान: सरकार की दुविधा
यह कदम वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के तंबाकू नियंत्रण फ्रेमवर्क के तहत उठाया जा रहा है। हालांकि, सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती किसानों की आजीविका की है। आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में लाखों किसान तंबाकू की खेती पर निर्भर हैं। सरकार को डर है कि अगर विदेशी निवेश कम हुआ, तो रॉ क्रॉप (कच्चे माल) की डिमांड गिर सकती है, जिससे किसानों की इनकम पर बुरा असर पड़ सकता है।
2024 के बाद फिर चर्चा में प्रस्ताव
यह पहली बार नहीं है जब सरकार इस तरह के सख्त कदम पर विचार कर रही है। साल 2024 में भी ऐसा ही प्रयास किया गया था, जिसे किसान संघों के भारी विरोध के बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अब डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) इसके इम्पैक्ट का आकलन कर रहा है कि क्या तंबाकू पर सख्त नियम वास्तव में स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्यों को पूरा करेंगे या केवल औपचारिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को ही नुकसान पहुंचाएंगे।
