Orkla India अब GCC बाजारों में सिर्फ मसालों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अपने फूड प्रोडक्ट्स का दायरा बढ़ाएगी। कंपनी ने जून 2026 तिमाही में **10.4%** रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, हालांकि मसालों की ऊंची कीमतों से मार्जिन पर दबाव बना हुआ है।
Orkla India की नई रणनीति
MTR और Eastern जैसे ब्रांड्स की पैरेंट कंपनी Orkla India अपनी इंटरनेशनल स्ट्रेटेजी को और मजबूत कर रही है। कंपनी गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के बाजारों में मसालों पर अपनी पुरानी पकड़ से आगे बढ़कर एक विस्तृत फूड पोर्टफोलियो पेश करने जा रही है। यह बड़ा कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब कंपनी ने इस क्षेत्र में 18.1% का शानदार बिज़नेस ग्रोथ जून तिमाही में हासिल किया है।
कैसे रहे नतीजे?
फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में Orkla India का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹659 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 10.4% ज्यादा है। वहीं, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में भी 11.1% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹87.7 करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि, रेवेन्यू और प्रॉफिट में ग्रोथ के बावजूद, कंपनी को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा। EBITDA मार्जिन पिछले साल के 18.73% से घटकर 17.05% पर आ गया। इसका मुख्य कारण कच्चे माल, खासकर लाल मिर्च और धनिया की बढ़ती कीमतें हैं, जिनमें लगातार महंगाई देखी जा रही है।
डोमेस्टिक मार्केट में क्या है प्लान?
घरेलू बाजार में, Orkla India कन्वीनियंस फूड और ब्रेकफास्ट प्रोडक्ट्स पर पूरा जोर दे रही है। कंपनी ने एक नई थ्री-प्रॉन्ग स्ट्रेटेजी अपनाई है, जिसमें युवाओं को टारगेट करते हुए प्रोटीन-रिच ब्रेकफास्ट आइटम्स की एक रेंज शामिल है। इसके अलावा, डिजिटल कॉमर्स का फायदा उठाकर अपनी पहुंच बढ़ा रही है और हैदराबाद जैसे की मार्केट्स में चावल और रवा बैटर जैसे क्षेत्रीय पसंदीदा प्रोडक्ट्स का प्रोडक्शन बढ़ा रही है। एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए, कंपनी ने अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क्स को रीस्ट्रक्चर करना भी शुरू कर दिया है। केरल में एक पायलट प्रोजेक्ट से सेल्स प्रोडक्टिविटी में शुरुआती सुधार देखा गया है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
इन्वेस्टर्स को आने वाले महीनों में इन नए प्रोडक्ट लाइन्स और डिस्ट्रीब्यूशन बदलावों के प्रदर्शन पर नजर रखनी चाहिए। कंपनी भले ही जीरो नेट-डेट स्टेटस के साथ मजबूत फाइनेंशियल पोजीशन में है, लेकिन इसकी प्रॉफिटेबिलिटी कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनी हुई है। मसालों की लगातार महंगाई ऑपरेटिंग मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। साथ ही, पश्चिम एशिया की जटिल जियो-पॉलिटिकल सिचुएशन के बीच इंटरनेशनल सप्लाई चेन्स को मैनेज करना कंपनी के लिए एक चुनौती होगी, जो GCC बिजनेस के विकास को प्रभावित कर सकती है।
आगामी 19 अगस्त, 2026 को होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में कंपनी के मैनेजमेंट से इंटरनल प्लान्स और स्ट्रेटेजिक प्रायोरिटीज पर और अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है।
