Old Monk के निर्माता Mohan Rocky Springwater पर महाराष्ट्र में बिक्री का संकट छा गया है। FSSAI के साथ लेबलिंग विवाद के चलते कंपनी को **₹500 करोड़** का नुकसान हुआ है, वहीं राज्य के आबकारी विभाग को **₹350 करोड़** का घाटा झेलना पड़ रहा है। बॉम्बे हाई कोर्ट में अब अगली सुनवाई **23 अक्टूबर, 2026** को होगी।
लोकप्रिय स्पिरिट ब्रांड Old Monk बनाने वाली कंपनी Mohan Rocky Springwater इस समय महाराष्ट्र में बड़े नियामकीय (Regulatory) विवाद में फंसी है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने कंपनी की ठाणे स्थित फैसिलिटी में बनने वाले कुछ वेरिएंट्स की बिक्री पर रोक लगा दी है। विवाद मुख्य रूप से प्रोडक्ट की लेबलिंग और मार्केटिंग के तरीकों को लेकर है।
नियामक का कहना है कि वर्तमान लेबलिंग ग्राहकों को गुमराह करती है। FSSAI ने 'रम' (Rum) जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है, क्योंकि कंपनी इसमें आर्टिफिशियल या नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवरिंग का इस्तेमाल करती है। रेगुलेटर का मानना है कि ऐसे प्रोडक्ट्स पर साफ तौर पर 'रम-फ्लेवर्ड' या 'रम-लाइक' लिखा होना चाहिए। इसके अलावा, कंपनी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले '7 ईयर्स ओल्ड ब्लेंडेड' और 'वेरी ओल्ड वेटेड' जैसे मार्केटिंग डिस्क्रिप्शन पर भी सवाल उठाए गए हैं।
वित्तीय और ऑपरेशनल असर
बिक्री पर लगी इस रोक का कंपनी के कामकाज पर सीधा असर पड़ा है। बॉम्बे हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कंपनी के वकील ने बताया कि इस विवाद के चलते कॉर्पोरेट को ₹500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा है। इस संकट का असर सरकारी खजाने पर भी दिख रहा है; महाराष्ट्र आबकारी विभाग को प्रोडक्शन रुकने की वजह से ₹350 करोड़ का राजस्व घाटा हुआ है। इतना ही नहीं, ठाणे फैक्ट्री में काम बंद होने से लगभग 300 कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं।
कंपनी ने अपनी लेबलिंग में बदलाव कर समाधान निकालने की कोशिश की है, लेकिन अब तक FSSAI के साथ कोई सहमति नहीं बन पाई है।
कानूनी कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
यह मामला अब बॉम्बे हाई कोर्ट में है, जिसकी सुनवाई चीफ जस्टिस एमसी त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच कर रही है। कोर्ट ने फिलहाल बिक्री पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया है। मामले की अगली और अंतिम सुनवाई 23 अक्टूबर, 2026 को तय की गई है। इस सुनवाई से यह स्पष्ट हो जाएगा कि कंपनी को FSSAI के नियमों के अनुसार बदलाव करने होंगे या कोर्ट राहत देगा।
बता दें कि Mohan Rocky Springwater एक प्राइवेट और अनलिस्टेड कंपनी है, इसलिए इसका सीधा असर शेयर बाजार पर नहीं है। हालांकि, यह केस अल्कोहलिक बेवरेज सेक्टर के लिए एक बड़ा सबक है कि लेबलिंग और रेगुलेटरी नियमों का पालन करना कितना जरूरी है।
