तेल की कीमतों में उछाल ने होम अप्लायंस सेक्टर को बांटा
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के $100 प्रति बैरल के पार जाने से भारत के घरेलू उपकरणों (होम अप्लायंस) बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां एक ओर भू-राजनीतिक तनाव कमोडिटी की कीमतों को ऊपर धकेल रहा है, वहीं दूसरी ओर यह बदलाव कुछ कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है, जबकि कुछ के लिए लागत बढ़ा रहा है।
इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर बढ़ता झुकाव
महंगी होती कुकिंग गैस (LPG) के कारण घर अब इलेक्ट्रिक कुकिंग एप्लायंसेज की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, जिससे इंडक्शन कुकटॉप और इलेक्ट्रिक केटल जैसे उपकरणों की मांग बढ़ी है। इस ट्रेंड का फायदा Bajaj Electricals को मिला, जिसके शेयर 2% चढ़कर ₹375.50 पर पहुंच गए। वहीं, Stove Kraft में 3% और Butterfly Gandhimathi Appliances में 1% तक की तेजी देखी गई। निवेशकों को उम्मीद है कि इन कंपनियों की बिक्री में बढ़ोतरी होगी।
क्यों गिरे कुछ प्रमुख स्टॉक्स?
इसके विपरीत, TTK Prestige और Hawkins Cookers जैसे स्थापित ब्रांडों के शेयरों में गिरावट आई, जो क्रमश: 0.82% और 0.72% फिसल गए। यह बड़ी गिरावट बताती है कि तेल की ऊंची कीमतों का असर सभी पर एक जैसा नहीं हो रहा है। कंपनियों के प्रोडक्ट मिक्स, मौजूदा इन्वेंटरी, तेल-संवेदनशील इनपुट मैटेरियल्स पर निर्भरता, या लागतें बढ़ाने की क्षमता जैसी बातों का नतीजों पर अलग-अलग असर पड़ रहा है।
वैल्यूएशन और निवेशकों का भरोसा
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 तक Bajaj Electricals का P/E रेशियो करीब 38x और मार्केट कैप ₹12,500 करोड़ था। Butterfly Gandhimathi Appliances का P/E लगभग 45x और मार्केट कैप ₹5,500 करोड़ था, जबकि Stove Kraft का P/E 32x और मार्केट कैप ₹2,200 करोड़ था। दूसरी ओर, TTK Prestige का P/E 28x और मार्केट कैप ₹7,000 करोड़ था, और Hawkins Cookers का P/E 25x व मार्केट कैप ₹1,500 करोड़ था। तेजी वाले शेयरों के उच्च P/E मल्टीपल बताते हैं कि निवेशक भविष्य की ग्रोथ को लेकर उत्साहित हैं, वहीं पिछड़ने वाली कंपनियों को अधिक परिपक्व या चुनौतियों का सामना करने वाला माना जा रहा है।
बढ़ती इनपुट लागतें मार्जिन पर डाल रही दबाव
ऊंचे तेल की कीमतों का असर मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर भी पड़ रहा है। प्लास्टिक और मेटल जैसे रॉ मैटेरियल्स की कीमतें एनर्जी प्राइस से जुड़ी होती हैं, जिससे प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। TTK Prestige और Hawkins जैसी कंपनियां, जो एनर्जी-सेंसिटिव मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस पर निर्भर हैं, वे अधिक प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा, महंगाई के चलते कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर होने वाला खर्च भी सालाना केवल 3-4% ही बढ़ रहा है, जो कुल मांग को सीमित कर सकता है।
भू-राजनीतिक तनाव और सेक्टर का भविष्य
होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने तेल की कीमतों को $100 के पार पहुँचाया है। इस अस्थिरता से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में उतार-चढ़ाव संभव है, क्योंकि महंगाई लोगों की खरीदने की क्षमता को कम करती है। अगले फाइनेंशियल ईयर में इस सेक्टर की ग्रोथ दर घटकर 6-7% रहने का अनुमान है, जो पहले के अनुमानों से कम है।
पिछले तेल मूल्य उछालों से सीख
पिछले एक साल में भी जब कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया था, तब एप्लायंस स्टॉक्स में थोड़ी तेजी दिखी थी, लेकिन इनपुट कॉस्ट और महंगाई के दबाव के कारण वे बाद में स्थिर हो गए थे। उदाहरण के तौर पर, 2025 की शुरुआत में Bajaj Electricals 5% चढ़ा था, जबकि TTK Prestige 3% गिर गया था। यह पैटर्न बताता है कि वर्तमान उछाल एक अल्पकालिक लाभ दे सकता है, लेकिन दीर्घकालिक तस्वीर महंगाई प्रबंधन और स्थायी उपभोक्ता मांग पर निर्भर करेगी।
मुख्य जोखिम: मार्जिन, मांग और खर्च
इलेक्ट्रिक एप्लायंसेज की मांग बढ़ने के बावजूद, मार्जिन पर दबाव सबसे बड़ा जोखिम है। एनर्जी प्राइस बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ रही है। TTK Prestige और Hawkins जैसी कंपनियां, जिनकी प्राइसिंग पावर सीमित है या जिनका प्रोडक्ट मिक्स कम अनुकूल है, वे अधिक कमजोर हो सकती हैं। लगातार ऊंची एनर्जी प्राइसिंग से अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता खर्च पर भी असर पड़ सकता है।