OYO के फाउंडर रितेश अग्रवाल की फैमिली ऑफिस ने गुरुग्राम की Lab-Grown डायमंड ज्वैलरी ब्रांड Emori में निवेश किया है। शार्क टैंक इंडिया सीजन 5 में फाइनल हुए इस डील ने कंपनी का वैल्यूएशन ₹50 करोड़ कर दिया है। यह कदम युवा ग्राहकों के बीच किफायती, Lab-Grown डायमंड ज्वैलरी की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
क्या हुआ?
OYO के फाउंडर और ग्रुप सीईओ रितेश अग्रवाल ने Emori, एक गुरुग्राम-आधारित Lab-Grown डायमंड ज्वैलरी स्टार्टअप, में निवेश किया है। यह निवेश टेलीविज़न शो शार्क टैंक इंडिया के पांचवें सीज़न के दौरान फाइनल किया गया। अग्रवाल ने अनुपम मित्तल, अमित जैन और नम्रता थापर जैसे अन्य निवेशकों के साथ मिलकर कंपनी के लिए ₹3 करोड़ जुटाए। इस डील से Arja Technologies Private Limited द्वारा संचालित इस बिजनेस का वैल्यूएशन लगभग ₹50 करोड़ हो गया है।
कंपनी के लिए क्यों अहम है ये डील?
Emori खुद को एक ऑनलाइन-फर्स्ट ब्रांड के तौर पर पेश करता है, जो 14-कैरेट और 18-कैरेट सोने में Lab-Grown डायमंड ज्वैलरी पेश करके युवा ग्राहकों, खासकर मिलेनियल्स और Gen Z को टारगेट करता है। इस फंडिंग से कंपनी को अपने ऑपरेशन्स को बढ़ाने, फिजिकल रिटेल प्रेजेंस का विस्तार करने, इन्वेंट्री मजबूत करने और व्यापक बाजार तक पहुंचने में मदद मिलेगी। यह कंपनी प्राइस-सेंसिटिव लेकिन डिज़ाइन-ओरिएंटेड ग्राहकों को टारगेट करके एक्सेसिबल लग्जरी (accessible luxury) की बढ़ती मांग का फायदा उठा रही है। कंपनी ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में रेवेन्यू में ग्रोथ दर्ज की है और ऑनलाइन बिक्री के साथ-साथ फिजिकल स्टोर को मिलाकर एक ओमनीचैनल अप्रोच (omnichannel approach) के जरिए अपनी मार्केट रीच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
भारत में Lab-Grown डायमंड्स का उदय
यह निवेश भारतीय ज्वैलरी सेक्टर में एक बड़े बदलाव को उजागर करता है। 2026 तक, Lab-Grown डायमंड्स (LGDs) कई भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक मुख्यधारा का विकल्प बन गए हैं। ये डायमंड्स रासायनिक, भौतिक और ऑप्टिकली रूप से माइन्ड डायमंड्स (mined diamonds) के समान होते हैं, लेकिन इन्हें नियंत्रित लैब वातावरण में बनाया जाता है। उपभोक्ताओं के लिए इसका मुख्य आकर्षण कीमत का फायदा है—आमतौर पर माइन्ड डायमंड्स की तुलना में 30% से 50% कम—और स्थायी सोर्सिंग (sustainable sourcing) की नैतिक अपील है।
मार्केट डेटा बताता है कि भारतीय खरीदार रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए प्रमाणित, पारदर्शी कीमत वाली ज्वैलरी को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस बदलाव को डायमंड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहलों का भी समर्थन मिला है, जिसने उत्पादन क्षमताओं में सुधार किया है और घरेलू ब्रांडों के लिए लागत कम की है। नतीजतन, मार्केट में ऐसे कई ब्रांड्स आए हैं जो आधुनिक, गैर-पारंपरिक डिज़ाइनों की पेशकश करके प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जो सिर्फ शादियों तक सीमित न होकर रोजमर्रा के उपयोग को भी पूरा करते हैं।
बिजनेस रिस्क और मार्केट चुनौतियां
हालांकि यह सेक्टर बढ़ रहा है, लेकिन यह अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बना हुआ है। कई D2C (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) ब्रांड्स के प्रवेश और बड़े, स्थापित ज्वैलर्स द्वारा LGD पोर्टफोलियो का विस्तार करने की संभावना को देखते हुए, प्राइसिंग प्रेशर (pricing pressure) एक स्थायी वास्तविकता है। Emori जैसे ब्रांड्स की सफलता उनकी ब्रांड लॉयल्टी बनाए रखने, इन्वेंट्री को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने और माइन्ड स्टोन्स की तुलना में Lab-Grown डायमंड्स के रीसेल वैल्यू (resale value) के बारे में उपभोक्ताओं की बदलती धारणाओं को नेविगेट करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
आगे क्या देखना है?
मार्केट ऑब्जर्वर्स और इंडस्ट्री एनालिस्ट्स के लिए, मुख्य निगरानी यह होगी कि कंपनी भीड़ भरे बाजार में रेवेन्यू बढ़ाने में कितनी सफल होती है। विशेष रूप से, ब्रांड का नए शहरों में विस्तार, मार्केटिंग खर्च के बीच लाभ मार्जिन बनाए रखने की क्षमता, और यह अन्य उभरते LGD ज्वैलरी प्लेयर्स के मुकाबले अपने उत्पाद डिज़ाइन को कैसे अलग करता है, यह ब्रांड की दीर्घकालिक स्थिरता की स्पष्ट तस्वीर प्रदान करेगा।
