भारत में डायमंड ज्वेलरी का बाजार इन दिनों एक बड़े बदलाव से गुज़र रहा है। अब बॉलीवुड की जगह ग्लोबल स्ट्रीमिंग सीरीज नए डिज़ाइन्स की प्रेरणा बन रही हैं, जिससे हल्के और रोज़मर्रा में पहने जाने वाले डायमंड ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ी है। सोने की बढ़ती कीमतों और युवा ग्राहकों की पसंद ने ₹90,000 करोड़ के इस बाजार को पूरी तरह से बदल दिया है।
Detailed Coverage
क्यों बदल रही है ज्वेलरी की दुनिया?
पहले जहां बॉलीवुड सेलेब्स और शादियों के भारी-भरकम गहने स्टाइल स्टेटमेंट हुआ करते थे, वहीं अब हालात बदल गए हैं। विदेशी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर दिखाई जाने वाली वेब सीरीज से प्रेरित होकर युवा पीढ़ी मिनिमलिस्ट और ट्रेंडी डिज़ाइन्स की ओर आकर्षित हो रही है।
नतीजों में दिख रहा है असर
इस नए ट्रेंड का असर डायमंड ज्वेलरी के ₹90,000 करोड़ के बाजार पर साफ दिख रहा है। ज्वेलरी रिटेलर्स के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में डायमंड ज्वेलरी की बिक्री में 20% से 43% तक की ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है। यही नहीं, अब इन 'इंटरनेशनल' स्टाइल वाले डिज़ाइन्स का कंपनी के कुल बिक्री में योगदान 40% तक पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यह सिर्फ 15-20% था।
सोने के दाम और ग्राहकों की पसंद
सोने की कीमतों में लगातार आ रही तेज़ी भी इस बदलाव का एक बड़ा कारण है। महंगे सोने के चलते ग्राहक अब हल्के और रोज़मर्रा में पहनने लायक ज्वेलरी की ओर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं। यही वजह है कि भारी-भरकम स्टेटमेंट ज्वेलरी की तुलना में स्टडेड और इल्यूजन-सेट ज्वेलरी की मांग दोगुनी रफ़्तार से बढ़ रही है। ज्वैलर्स भी अब 9KT गोल्ड के हल्के प्रोडक्ट्स पर ज़ोर दे रहे हैं, जो ग्राहकों की मौजूदा पसंद से मेल खाते हैं।
'सेल्फ-एक्सप्रेशन' का ज़रिया बनी ज्वेलरी
खासतौर पर मिलेनियल्स और जेन-जी के लिए, ज्वेलरी अब सिर्फ वैल्यू स्टोर करने का ज़रिया नहीं, बल्कि खुद को एक्सप्रेस करने का ज़रिया बन गई है। 40 साल से कम उम्र के खरीदार अब कई बड़े ज्वेलरी ब्रांड्स के 55% से ज़्यादा ग्राहक बन चुके हैं। स्टैकेबल रिंग्स, लेयर्ड नेकलेस और रोज़मर्रा के इस्तेमाल वाले इयररिंग्स जैसे आइटम्स काफी पॉपुलर हो रहे हैं।
निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें
हालांकि, यह नया ट्रेंड फिलहाल ग्रोथ को सपोर्ट कर रहा है, लेकिन निवेशकों को बड़े ज्वेलरी रिटेलर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर नज़र रखनी होगी। जैसे-जैसे कंपनियां कम कैरेट गोल्ड और छोटे डायमंड डिज़ाइन्स की ओर बढ़ रही हैं, मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट और रिटेल प्राइस पॉइंट्स पर नज़र रखना ज़रूरी होगा। साथ ही, इस मांग की स्थिरता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि युवा और स्टाइल-कॉन्शियस ग्राहक आर्थिक उतार-चढ़ाव और सोने की कीमतों में तेज़ी के बावजूद अपनी खर्च करने की क्षमता बनाए रखते हैं या नहीं।
