Nike के लिए बड़ा झटका! इस बार वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में Nike की कोई भी स्पॉन्सर्ड टीम नहीं है, जबकि राइवल Adidas की टीमें दोनों फाइनल में भिड़ेंगी। यह ब्रांड विजिबिलिटी का गैप ऐसे समय में आया है जब Nike अपनी मार्केट शेयर में गिरावट और टर्नअराउंड स्ट्रैटेजी को लेकर निवेशकों के शक से जूझ रही है।
ब्रांड विजिबिलिटी पर भारी झटका
Nike के लिए इस बार का वर्ल्ड कप उसकी ब्रांडिंग के लिहाज से एक बड़ा झटका साबित हुआ है। फाइनल मुकाबले में Nike की एक भी स्पॉन्सर्ड टीम न होने से जर्मन स्पोर्ट्सवियर कंपनी Adidas को बड़ा फायदा होने वाला है। अर्जेंटीना और स्पेन, दोनों ही Adidas के समर्थन वाली टीमें फाइनल में खेलेंगी, जिससे इस मैच के दौरान दुनिया भर के कंज्यूमर का ध्यान Adidas पर ही रहेगा। यह स्थिति Nike के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है, जो पहले से ही मुश्किल ग्लोबल रिटेल माहौल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
इंडस्ट्री में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
स्पोर्ट्स अपैरल इंडस्ट्री में बड़े टूर्नामेंट्स ब्रांड की विजिबिलिटी और कंज्यूमर डिमांड बढ़ाने के लिए बहुत अहम होते हैं। Nike भले ही 12 टीमों के साथ इस टूर्नामेंट में उतरी थी, लेकिन फाइनल में किसी भी टीम के न होने से कंपनी को पीक एडवरटाइजिंग विंडो का फायदा उठाने का मौका नहीं मिलेगा। वहीं, Adidas 14 टीमों का समर्थन कर रही है, जिसमें फाइनल की दोनों टीमें शामिल हैं। M Science के मार्केट डेटा के अनुसार, एथलेटिक फुटवियर में ट्रेंड बदल रहा है। जून में Adidas का मार्केट शेयर बढ़कर 19.2% हो गया, जो पिछले साल 16.0% था, जबकि इसी दौरान Nike का शेयर लगातार गिरा है।
वित्तीय और ऑपरेशनल चुनौतियां
टूर्नामेंट में ब्रांड विजिबिलिटी के अलावा, Nike इस समय वित्तीय दबाव का भी सामना कर रही है। कंपनी के शेयर इस साल काफी गिरे हैं, जो सीईओ Elliott Hill की टर्नअराउंड प्लान की धीमी प्रगति से निवेशकों की निराशा को दर्शाता है। फाइनेंशियल एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनी को सिर्फ इवेंट-आधारित मार्केटिंग से कहीं ज्यादा गहरी स्ट्रक्चरल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। निवेशकों के लिए चिंता के मुख्य क्षेत्रों में बेहतर फुटवियर इनोवेशन की जरूरत, इन्वेंटरी मैनेजमेंट को टाइट करना और चीन जैसे मार्केट में सेल्स और प्रॉफिट मार्जिन को स्थिर करना शामिल है, जो ऐतिहासिक रूप से Nike के लिए एक बड़ा ग्रोथ इंजन रहा है।
निवेशकों की नजर
जहां Adidas ने पहली तिमाही में वर्ल्ड कप प्रोडक्ट्स के लिए करीब €250 मिलियन की बुकिंग दर्ज की है, वहीं इन मार्केटिंग लड़ाइयों का लॉन्ग-टर्म असर ब्रॉडर कंज्यूमर ट्रेंड्स से जुड़ा रहेगा। शेयरहोल्डर्स के लिए, तत्काल फोकस सिर्फ इवेंट-आधारित मार्केटिंग पर नहीं है, बल्कि इस बात पर है कि मैनेजमेंट प्रोडक्ट डेवलपमेंट और रीजनल सेल्स में अपनी स्ट्रैटेजिक शिफ्ट्स को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाता है। निवेशकों की नजर आने वाले तिमाही नतीजों पर रहेगी, ताकि मार्जिन स्टेबलाइजेशन के संकेत मिल सकें और यह साबित हो सके कि कंपनी अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच प्रभावी ढंग से अपनी पकड़ बना रही है।
