Nestlé India के पूर्व CMD सुरेश नारायणन ने अपनी नई किताब 'Courage Under Fire' में 2015 के Maggi संकट के दौर को याद किया है। उन्होंने बताया कि कैसे पारदर्शिता और कर्मचारियों के दम पर कंपनी ने उस मुश्किल वक्त से उबरकर वापसी की।
जुलाई 2026 में प्रकाशित सुरेश नारायणन की किताब 'Courage Under Fire' 2015 के उस दौर की एक केस स्टडी है, जब Maggi नूडल्स पर लगे आरोपों ने कंपनी के वजूद को खतरे में डाल दिया था।
लोगों पर भरोसा और पारदर्शिता ही थी जीत की कुंजी
साल 2015 में जब खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर Maggi को बाजार से वापस लेना पड़ा, तो कंपनी को लगभग 39,000 टन नूडल्स 50 लाख रिटेल आउटलेट्स से हटाने पड़े। उस वक्त Maggi कंपनी के कुल रेवेन्यू में करीब 30% का योगदान देती थी। नारायणन ने अपनी किताब में साफ किया है कि उनका ध्यान केवल फाइनेंशियल डैमेज कंट्रोल पर नहीं, बल्कि अपने कर्मचारियों और सप्लाई चेन से जुड़े लोगों का मनोबल बनाए रखने पर था। कंपनी ने अपनी पुरानी बंद कमरों वाली कॉर्पोरेट शैली को छोड़कर पूरी तरह पारदर्शी रवैया अपनाया, जो आज के अस्थिर बाजार के लिए एक मिसाल है।
फाइनेंशियल सेहत और बाजार का नजरिया
अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, Nestlé India आज एक लगभग debt-free (कर्ज मुक्त) कंपनी है। कंपनी निवेशकों को शानदार डिविडेंड देती आई है। फिलहाल कंपनी का शेयर ₹1,300 के आसपास ट्रेड कर रहा है। हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स अक्सर इसके महंगे P/E Ratio पर चर्चा करते हैं, जो इसे अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में थोड़ा महंगा बनाता है। निवेशक कंपनी की ब्रांड वैल्यू और स्थिरता के लिए ही यह प्रीमियम चुकाने को तैयार रहते हैं।
भविष्य की चुनौतियां और रिस्क
Nestlé के लिए चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। महंगाई के कारण बढ़ती इनपुट कॉस्ट कंपनी के मुनाफे पर दबाव डाल रही है। इसके अलावा, FMCG सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा है और लगातार नए इनोवेशन की मांग बनी रहती है। 2015 का इतिहास यह भी सिखाता है कि ब्रांड की इमेज और क्वालिटी से जुड़ा कोई भी सवाल कंपनी के मार्केट शेयर को सीधा नुकसान पहुँचा सकता है। बाजार अब इस पर नजर बनाए हुए है कि कंपनी कैसे बढ़ती लागत के बीच अपने मार्जिन को प्रोटेक्ट करती है और अपनी महंगी वैल्युएशन को कायम रखती है।
