Q4 FY26 के नतीजों में Nestle India ने अपने आप को साबित किया है। कंपनी ने कीमतों को बहुत ज्यादा न बढ़ाकर, वॉल्यूम पर फोकस किया, जिसके चलते 18% तक की वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की गई। यह दमदार प्रदर्शन खास तौर पर सामान्य व्यापार (General Trade) और ग्रामीण बाजारों (Rural Markets) में कंपनी की बढ़ती पैठ (penetration) का नतीजा है। कंपनी ने ब्रांड्स में री-इन्वेस्टमेंट (reinvestment) करके लंबी अवधि की ग्रोथ और डिमांड बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया।
मार्च 2026 को खत्म हुई तिमाही में, Nestle India का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (Consolidated Net Profit) पिछले साल के मुकाबले 27% उछलकर ₹1,110.9 करोड़ पर पहुंच गया। इसी दौरान, रेवेन्यू (Revenue) में 22.6% की बढ़ोतरी देखी गई और यह ₹6,747.79 करोड़ पर दर्ज हुआ। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे 50% से अधिक का विज्ञापन (Advertising) और सेल्स प्रमोशन (Sales Promotion) पर बढ़ा हुआ खर्च रहा। कंपनी के चेयरमैन और एमडी मनीष तिवारी ने बताया कि वॉल्यूम-ग्रोथ, ब्रांड्स में री-इन्वेस्टमेंट और कैपेसिटी बढ़ाने पर मुख्य फोकस है, और कंपनी ने बदलते कमोडिटी मार्केट (commodity market) के बावजूद अपनी मार्केट शेयर (market share) को बनाए रखा है।
हालांकि, Nestle India इस समय अपने कई कॉम्पटीटर्स (competitors) जैसे Britannia Industries (जिसका P/E रेश्यो 55-57 के आसपास है) और Hindustan Unilever (HUL) (जिसका P/E 33-53 के बीच है) की तुलना में काफी प्रीमियम वैल्यूएशन (premium valuation) पर ट्रेड कर रही है। अप्रैल 2026 तक Nestle India का P/E रेश्यो 71.7 से 80.18 की रेंज में था। मार्केट कैप (Market Cap) के हिसाब से Nestle India करीब ₹2.73 ट्रिलियन की थी, जो Britannia के ₹1.37 ट्रिलियन से तो काफी बड़ी है, लेकिन HUL के ₹5.41 ट्रिलियन से पीछे है। इन सब के बावजूद, स्टॉक ने पिछले साल 14.64% का रिटर्न दिया है और हाल ही में ₹1,425.20 का 52-हफ्ता हाई (52-week high) भी बनाया है।
कंपनी की वॉल्यूम-ग्रोथ पर ज्यादा ध्यान देने वाली रणनीति को इनपुट कॉस्ट (input costs) में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। FMCG सेक्टर में कच्चा तेल (crude oil) डेरिवेटिव्स, पाम ऑयल (palm oil) और पैकेजिंग मटीरियल (packaging materials) जैसी चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं, और पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) ने इस स्थिति को और बिगाड़ दिया है। Nuvama Institutional Equities का अनुमान है कि अगर कच्चे माल की महंगाई (inflation) ऐसे ही जारी रही, तो FY27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में 3-4% तक प्राइस हाइक (price hike) करनी पड़ सकती है। Nestle India का EBITDA मार्जिन 26.3% रहा, लेकिन बढ़ते खर्च और विज्ञापन पर भारी निवेश के बीच इस मार्जिन को बनाए रखना एक बड़ी चिंता का विषय है। वहीं, एक अनुमान के मुताबिक, सूखे मानसून (dry monsoon) का खतरा रूरल डिमांड (rural demand) को प्रभावित कर सकता है, जो FMCG सेक्टर की ग्रोथ के लिए एक महत्वपूर्ण खंड है।
इन चिंताओं के बावजूद, ज्यादातर ब्रोकरेज फर्म्स (brokerage firms) Nestle India के शेयर पर अभी भी बुलिश (bullish) नजर आ रही हैं। ICICI Securities ने 'BUY' रेटिंग को बरकरार रखते हुए अपने टारगेट प्राइस को ₹1,550 से बढ़ाकर ₹1,650 कर दिया है। Citi ने भी 'Buy' रेटिंग और ₹1,675 का टारगेट दिया है। Goldman Sachs और Jefferies जैसी फर्म्स ने 'Neutral' या 'Hold' रेटिंग दी है, लेकिन उन्होंने भी टारगेट बढ़ाए हैं। एनालिस्ट्स (Analysts) का औसतन 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹1,475 है, जो मौजूदा भाव से 17% से ज्यादा की तेजी का संकेत देता है। कंपनी ने FY26 के लिए ₹5 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (final dividend) भी रेकमेंड किया है।
