Nestle India: मैगी और किट कैट का सबसे बड़ा बाज़ार बना भारत! कंपनी ने ग्रोथ के लिए बनाई नई रणनीति

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AuthorMehul Desai|Published at:
Nestle India: मैगी और किट कैट का सबसे बड़ा बाज़ार बना भारत! कंपनी ने ग्रोथ के लिए बनाई नई रणनीति

Nestle India ने अब वॉल्यूम ग्रोथ पर फोकस करने का फैसला किया है। कंपनी अपनी पहुंच को क्वीक कॉमर्स (Quick Commerce) और ग्रामीण इलाकों में बढ़ाने की तैयारी में है। इसका मकसद है कि ज़्यादा से ज़्यादा घरों तक कंपनी के प्रोडक्ट्स पहुंचें, बिना कीमत बढ़ाए। भारत अब मैगी और किट कैट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार बन गया है।

क्या हुआ है?

Nestle India ने वॉल्यूम-led ग्रोथ को प्राथमिकता देने की एक नई रणनीति बनाई है। इसके तहत, कंपनी अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार करेगी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का ज़्यादा इस्तेमाल करेगी। कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष तिवारी ने हाल ही में हुई एनुअल जनरल मीटिंग में बताया कि भारत अब मैगी (Maggi) और किट कैट (KitKat) के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार बन गया है। इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए, कंपनी अपने रिटेल फुटप्रिंट को बढ़ा रही है। अप्रैल 2023 से अब तक लगभग 5.2 लाख नए आउटलेट्स जोड़े गए हैं, ताकि सेमी-अर्बन और ग्रामीण इलाकों के ग्राहकों तक पहुंचा जा सके।

डिजिटल चैनल और क्वीक कॉमर्स

क्वीक कॉमर्स (Quick Commerce) Nestle India के लिए एक अहम चैनल बनकर उभरा है। खासकर प्रीमियम प्रोडक्ट्स को मेट्रो शहरों के बाहर पहुंचाने में इसकी भूमिका बढ़ रही है। कंपनी ने बताया कि पिछले फाइनेंशियल ईयर में ऑनलाइन चैनल्स में 97% की ग्रोथ देखी गई है, जो ग्राहकों की खरीदारी की आदतों में बड़े बदलाव का संकेत देता है। कंपनी टचलेस डिमांड फोरकास्टिंग और ऑटोमेटेड सप्लाई चेन रीप्लेनिशमेंट को इंटीग्रेट कर रही है, ताकि क्वीक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की तेज़ डिलीवरी की उम्मीदों पर खरा उतरा जा सके।

कीमत बढ़ाने की बजाय वॉल्यूम पर फोकस

कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को मैनेज करने के लिए सीधे कीमत बढ़ाने के बजाय, Nestle India ऑपरेशनल एफिशिएंसी और प्रोडक्टिविटी में सुधार पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मुख्य रणनीति यह है कि लोग ज़्यादा बार खरीदारी करें और ज़्यादा से ज़्यादा घरों तक प्रोडक्ट्स पहुंचे। इससे प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रखने और कीमत के प्रति संवेदनशील ग्राहकों की मांग बनाए रखने में मदद मिलेगी, खासकर टियर-II और टियर-III बाजारों में।

प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में बदलाव

बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं के जवाब में, कंपनी अपने प्रोडक्ट्स के फॉर्मूलेशन में भी बदलाव कर रही है। इसमें चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट को कम करने के लिए साइंस-बेस्ड अप्रोच अपनाया जा रहा है। इसका लक्ष्य न्यूट्रिशन-केंद्रित एजेंडे के साथ तालमेल बिठाना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि बदले हुए प्रोडक्ट्स ग्राहकों को स्वीकार्य हों और फूड रेगुलेशन्स का पालन करें।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

निवेशकों को कंपनी की प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए, खासकर जब वह छोटे और ज़्यादा खर्चीले ग्रामीण बाजारों में विस्तार कर रही है। 97% डिजिटल ग्रोथ की स्थिरता, वॉल्यूम-led ग्रोथ की सफलता बनाम कच्चे माल की लागत का दबाव, और ब्रांड लॉयल्टी बनाए रखने में प्रोडक्ट रीफॉर्मूलेशन की प्रगति महत्वपूर्ण होगी। यह देखना भी ज़रूरी होगा कि कंपनी अपने विशाल रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को कितनी कुशलता से मैनेज करती है।

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