भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने Nestle India के खिलाफ तीन कानूनी मामले दर्ज किए हैं। मामला कंपनी के बच्चों के न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स में मार्केटिंग के दावों और क्वालिटी मानकों के उल्लंघन से जुड़ा है।
रेगुलेटर FSSAI ने Nestle India के इन्फैंट न्यूट्रिशन बिजनेस के खिलाफ तीन अलग-अलग कानूनी कार्यवाही शुरू की है। यह कार्रवाई कंपनी के प्रमुख उत्पादों, NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 की मार्केटिंग और क्वालिटी टेस्टिंग के बाद सामने आई है।
मार्केटिंग दावों पर रेगुलेटर की नजर
इनमें से दो मामले मार्केटिंग से जुड़े हैं। रेगुलेटर का आरोप है कि कंपनी अपने विज्ञापनों में '5 HMOs' और 'आसानी से पचने वाले' व्हे प्रोटीन (Whey Protein) के जो दावे कर रही है, वे मौजूदा कंज्यूमर प्रोटेक्शन कानूनों का उल्लंघन करते हैं। भारत में 'Infant Milk Substitutes Act, 1992' के तहत बच्चों के खाने-पीने की चीजों के विज्ञापन पर बहुत सख्त नियम हैं, ताकि इन्फैंट फीडिंग चॉइसेज को प्रभावित होने से बचाया जा सके।
क्वालिटी और बायोटिन का पेंच
तीसरा मामला प्रोडक्ट की क्वालिटी से संबंधित है। एक लैब टेस्टिंग के दौरान कंपनी के एक फॉलो-अप फॉर्मूला में 'बायोटिन' (Biotin) की मात्रा तय मानकों के मुताबिक नहीं पाई गई। खास बात यह है कि जब इस प्रोडक्ट का सैंपल एक स्वतंत्र रेफरल लैब (Referral Laboratory) में भेजा गया, तो वहां भी यह प्रोडक्ट क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरा नहीं उतरा, जिसके आधार पर अब रेगुलेटरी एक्शन लिया जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है अहम?
निवेशकों के लिए इन कानूनी कार्यवाही का नतीजा सबसे बड़ा 'मॉनिटरेबल' पॉइंट है। हालांकि यह रेगुलेटरी मामला है, लेकिन यह दर्शाता है कि सेक्टर में कंप्लायंस रिस्क कितना बड़ा है। ऐसी जांच से भविष्य में कंपनी पर आर्थिक जुर्माना लग सकता है या उन्हें अपने मार्केटिंग और ब्रांडिंग स्ट्रैटेजी में बदलाव करना पड़ सकता है। फिलहाल कंपनी की तरफ से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
