नाशिक की बाजरे पर आधारित फ़ूड स्टार्टअप Fudonik ने गज़ब का प्रदर्शन किया है। महज़ ₹3,500 के शुरुआती निवेश से शुरू हुई इस कंपनी ने अब ₹1.5 करोड़ का सालाना टर्नओवर पार कर लिया है। अब यह कंपनी विभिन्न प्रकार के बाजरे के उत्पाद बना रही है और सरकारी सबसिडी की मदद से अपने ऑपरेशंस का विस्तार कर रही है।
₹3,500 से ₹1.5 करोड़ का सफर
मैकेनिकल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट तुषार तलवार की यह कंपनी, Fudonik, लॉकडाउन के दौरान शुरू हुई एक छोटी सी कोशिश से आज एक बड़ा व्यवसाय बन गई है, जिसका सालाना टर्नओवर ₹1.5 करोड़ तक पहुँच गया है। यह कंपनी बाजरे से बने फ़ूड प्रोडक्ट्स, जैसे नूडल्स, पास्ता और स्नैक्स बनाने में माहिर है। भारतीय बाज़ार में किफायती और सेहतमंद खाने के विकल्पों में इसने अपनी एक खास जगह बनाई है।
सरकारी मदद से मिली रफ्तार
कंपनी के विकास में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उसे केंद्र सरकार की 'सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारिकरण हेतु प्रधानमंत्री (PMFME)' योजना के तहत ₹10 लाख की सबसिडी मिली। इस आर्थिक मदद से कंपनी को शुरूआती दौर में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग पर निर्भर रहने की बजाय खुद के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिला। साल 2025 में, कंपनी ने नासिक में अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की, जहाँ फिलहाल बाजरे के 15 अलग-अलग तरह के खाकरे बनाए जा रहे हैं। यह खुद की प्रोडक्शन कैपेसिटी कंपनी को अपनी रेसिपी और सप्लाई चेन की क्वालिटी पर बेहतर नियंत्रण रखने में मदद करती है।
बिजनेस मॉडल और बाज़ार तक पहुंच
Fudonik ने कॉम्पिटिटिव हेल्दी-स्नैक सेगमेंट में अपनी जगह बनाने के लिए आक्रामक मूल्य निर्धारण (aggressive pricing) की रणनीति अपनाई है। सीधे तौर पर बाजरा खरीदकर और ऑपरेशनल खर्चों को कम रखकर, कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स को कई बड़े हेल्थ-फ़ूड ब्रांड्स की तुलना में कम कीमत पर पेश किया है। वर्तमान में, कंपनी के पास लगभग 2,500 रिटेल ग्राहक हैं और यह बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) सेल्स चैनलों का भी विस्तार कर रही है। मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में फिलहाल 8 स्थानीय महिलाओं को रोज़गार मिल रहा है, जो फूड प्रोसेसिंग के एक छोटे पैमाने के विकेन्द्रीकृत (decentralized) दृष्टिकोण को दर्शाता है।
चुनौतियाँ और भविष्य की योजनाएं
घर-आधारित ऑपरेशन से एक औपचारिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में बदलना आसान नहीं था। कंपनी को बाजरे के आटे को प्रोसेस करने वाली मशीनों को ऑप्टिमाइज़ करने जैसी तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ा, क्योंकि बाजरे का आटा बिना एडिटिव्स के प्रोसेस करना मुश्किल होता है। कंपनी का फोकस अभी भी नेचुरल प्रोडक्ट प्रोफाइल बनाए रखने पर है, जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा सेलिंग पॉइंट है। Fudonik के विकास के अगले चरण में बाजरे की कुकीज़ की एक नई रेंज पेश करने की योजना है, क्योंकि कंपनी अपने मौजूदा प्रोडक्ट्स के अलावा पोर्टफोलियो में विविधता लाना चाहती है। इस ग्रोथ की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अपने बढ़ते हुए डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को कैसे मैनेज करती है और प्रोडक्शन बढ़ाने के साथ-साथ क्वालिटी को कैसे बनाए रखती है।
